प्रदेश की सभी प्रमुख नदियां एक बार फिर उफान पर हैं। गंगा, यमुना, शारदा, घाघरा, केन और राप्ती समेत सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
कई जगह नदियां खतरे के निशान को पार कर गई हैं। पिछले 24 घंटे में बाढ़ से चार लोगों की जान चली गई।
बाढ़ से अब तक मरने वाले लोगों की संख्या 131 पहुंच चुकी है।
गंगा नदी नरौरा में डीएस पर, शारदा पलियाकलां में, घाघरा एल्गिन ब्रिज और अयोध्या में, बूढ़ी राप्ती ककहरी (सिद्धार्थनगर) में, कुआनो मुखलिसनगर (संतकबीर नगर) में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
गंगा का जलस्तर कन्नौज, फर्रूखाबाद, कानपुर नगर, रायबरेली और इलाहाबाद में बढ़ रहा है। केन का जलस्तर में बांदा, बेतवा का जालौन तथा घाघरा का जलस्तर अयोध्या और बलिया में लगातार बढ़ रहा है।
राहत आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटे में संतकबीर नगर में चार जनहानि और एक पशु हानि हुई है।
अवध क्षेत्र में सीतापुर में 21, बहराइच में 42 और बाराबंकी में आठ गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।
लापरवाही हुई तो नपेंगे अफसर
बाढ़ राहत कार्यों में लापरवाही बरतना अफसरों को भारी पड़ सकता है। मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने कहा है कि राहत कार्यों में ढिलाई बरतने वाले अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने मातहतों को निर्देश दिए हैं कि रात 12 बजे तक कंट्रोल रूम में फोन करके देखा जाए कि वहां कर्मचारी मौजूद हैं और सही काम कर रहे हैं या नहीं।
उन्होंने आकाशीय बिजली या आकस्मिक कारणों से जान गंवाने वालों के परिवार को मदद पहुंचाने के लिए भी कहा है। मुख्य सचिव ने शुक्रवार को शास्त्री भवन में बाढ़ एवं राहत कार्यों की जिले व विभागवार समीक्षा की।
उन्होंने कहा, नदियों के किनारे निचले स्थान पर बसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।