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कंटेनरों की किल्लत ने बढ़ाई कांच निर्यातकों की चिंता

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मुकेश बंसल टोनी - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। विदेशी त्योहार के ऐन मौके पर कंटेनर की किल्लत से सुहागनगरी के कांच निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। निर्यातकों का कहना है कि गेटवे पोर्ट पर कंटेनर उपलब्ध नहीं होने के कारण 200 करोड़ से ज्यादा लागत वाले कांच उत्पाद एक्सपोर्ट इकाइयों और बंदरगाहों पर डंप है। कांच निर्यातकों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से तत्काल संज्ञान लेने की गुुहार लगाई है।
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अगले माह से विदेेशों में आयोजित होने वाले हार्वेस्ट, ईस्टर, हैलोविन एवं क्रिसमस जैसे त्योहार नजदीक हैं। लेकिन इन विदेेशी त्योहारों के मद्देनजर करोड़ों का आर्डर लेेने वाले सुहागनगरी में कांच उत्पादों के निर्यातकों समय से माल पहुंचाने की चिंता सता रही है। कारण कांच उत्पादों को विदेशों तक पहुंचाने के लिए जरूरी कंटेनरों की किल्लत है।
कांच निर्यातकों की माने तो कंटेनर उपलब्ध नहीं होने के कारण लगभग 200 करोड़ से ज्यादा की लागत वाले कांच उत्पाद निर्माण इकाईयों के अलावा दादरी, आगरा, तुगलकाबाद एवं प्याला नामक स्थानों पर स्थित कंटेनर डिपो पर डंप है। जल्द कंटेनर उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उक्त कांच उत्पाद समय से संबंधित देशों में सप्लाई नहीं हो पाएंगे। इस कारण आर्डर निरस्त हो सकते हैं।
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गंतव्य तक माल पहुंचाने में लगते हैं दो माह
निर्यात किए जाने वाले कांच उत्पादों को सीधे मुंबई के जेएनपीटी एवं मुद्रा बंदरगाह से विदेशों को भेजा जाता है। सामान्य स्थिति में उक्त जलमार्ग के जरिए माल 21 दिन में गंतव्य तक पहुंच जाता है। लेकिन जलमार्ग परिवहन व्यवस्था में हुए बदलाव के कारण ताजा स्थिति में अमेरिका, जर्मनी, डेनमार्क, हॉलैंड, ब्राजील, स्पेन, स्वीडन और इंग्लैंड, कनाडा एवं कोलंबिया आदि देशों में कांच उत्पाद की सप्लाई सुनिश्चित होने में दो माह तक का वक्त लग रहा है। जबकि नवंबर से फरवरी तक विदेेशों में धार्मिक व परंपरागत पर्वों की धूम रहेगी।
सरकार तत्काल कंटेनर की किल्ल्त दूर कराने पर ध्यान दे। करोड़ों की लागत से तैयार कांच उत्पाद अगर समय से विदेशी ग्राहकों तक नहीं पहुंचे। तो कांच निर्यातकों को करोड़ों का झटका लगेगा।
नमन बंसल, कांच निर्यातक
कंटेनरों की किल्लत लगभग दो माह से चल रही है। कई बार केंद्र व प्रदेश सरकार को अवगत कराने पर समाधान नहीं हुआ है। अगर कंटेनरों समय से उपलब्ध नहीं होंगे तो निर्यात संबंधी आर्डर कैसे पूरे होंगे। करोड़ों का माल इधर-उधर डंप है।
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मुकेश बंसल टोनी, निर्यातक
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