फिरोजाबाद। थाना अरांव क्षेत्र के ग्राम नगला राधे से करीब नौ माह पहले लापता हुई 17 वर्षीय किशोरी के मामले में रहस्य और गहरा गया है। पुलिस द्वारा मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए आरोपियों का नारको टेस्ट कराने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन आरोपियों के परिजनों ने इसके लिए रजामंदी देने से साफ इन्कार कर दिया है। इधर, एसएसपी ने भी इस संबंध में सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है।
बता दें कि अरांव थाने के नगला राधे निवासी एक किशोरी 31 जुलाई 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में घर से लापता हो गई थी। पीड़ित पिता की तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर तफ्तीश शुरू की। विवेचना के दौरान किशोरी के मोबाइल की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) खंगाली गई, जिसमें तीन स्थानीय युवकों के साथ उसकी बातचीत होने की पुष्टि हुई। पुलिस ने संदेह के आधार पर तीनों युवकों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की थी, लेकिन उन्होंने किशोरी के बारे में कोई भी पुख्ता जानकारी होने से इन्कार कर दिया। साक्ष्यों के अभाव और पूछताछ में सहयोग न मिलने पर पुलिस ने तीनों को जेल भेज दिया था। वर्तमान में तीनों आरोपी न्यायालय से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर हैं।
पुलिस प्रशासन इस मामले में नारको टेस्ट के जरिए सच्चाई सामने लाना चाहता था। कानूनन, किसी भी व्यक्ति का नारको टेस्ट कराने के लिए उसकी या उसके परिजनों की सहमति अनिवार्य होती है। जब पुलिस ने आरोपियों के परिजनों से संपर्क किया, तो उन्होंने टेस्ट के लिए सहमति नहीं दी। परिजनों के इस रुख के बाद पुलिस के सामने किशोरी की बरामदगी को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
पुलिस के हाथ अब तक खाली
घटना के नौ महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस के पास किशोरी को लेकर कोई ठोस सुराग या सबूत नहीं है। पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी है। हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के मद्देनजर पुलिस पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
बयान
लापता किशोरी के मामले में पुलिस हर संभव वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं पर काम कर रही है। आरोपियों के परिजनों ने नारको टेस्ट के लिए सहमति नहीं दी है, इसकी जानकारी न्यायालय को दे दी गई है। मामले की गहनता से छानबीन जारी है।