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प्रेरणा एप की अनिवार्यता से एआरपी बनने से तौबा कर रहे ‘गुरुजी’

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फिरोजाबाद। एक समय था कि जब एबीआरसी या एनपीआरसी बनने की बात आती थी तो गुरुजी की लाइनें लग जाती थी। लेकिन प्रेरणा एप लागू होने के बाद शासन ने एआरपी (शिक्षक एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) चयन की प्रक्रिया शुरू की तो गुरुजी पद से तौबा कर रहे हैं। इसके लिए बीएसए को 50 पदों के सापेक्ष कुल 80 आवेदन ही मिले हैं।
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एबीआरसी बनने के बाद गुरुजी ब्लाक संसाधन केंद्रों पर ही बैठते थे। कई शिक्षक कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी पढ़ाने नहीं जाते थे। मगर प्रेरणा एप लागू होने के बाद से गुरुजी पद को अपनाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। क्योंकि प्रेरणा एप से ही उनकी हाजिरी लगेगी। इतना ही नहीं उन्होंने क्या-क्या काम किया उसकी पूरी लोकेशन ट्रेस होगी।
जनपद में नए सिरे से एआरपी का विषय के अनुसार चयन किया जाना था। किंतु 50 पदों के सापेक्ष कुल 80 आवेदन आए हैं। वहीं, विषयों के अनुसार आवेदन नहीं आए हैं। जबकि दो बार फार्म भरने की तिथि बढ़ाई जा चुकी है। कई ब्लाक तो ऐसे उनमें सभी विषयों के एआरपी नहीं है। त्रिस्तरीय प्रक्रिया के बाद एआरपी का चयन होगा। यानि इन्हीं में से पास करना बेसिक शिक्षा विभाग की मजबूरी बन जाएगा। बीएसए अरविंद पाठक ने बताया कि एआरपी चयन की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद से कम आवेदन आए हैं। चयन प्रक्रिया नियमानुसार की जाएगी।
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प्रेरणा एप का डर
एआरपी बनने के लिए प्रेरणा एप का उपयोग अनिवार्य किया है। इससे शिक्षकों की जियो टैगिंग होगी। अभी तक शिक्षक ब्लाक पर सह समन्वयक बनने के बाद मौज की काटते थे। अब ऑनलाइन मानिटरिंग की जा रही।
चयन प्रक्रिया की गई कठिन
विषयवार लिखित परीक्षा 60 अंकों की, माइक्रो टीचिंग-शिक्षण प्रदर्शन 10 से 15 मिनट प्रति प्रतिभागी 30 अंक और साक्षात्कार 10 अंक का होगा, लिखित परीक्षा में 60 प्रतिशत अंक पाने वाले ही साक्षात्कार में बुलाए जाएंगे। इसी तरह अन्य परीक्षाओं में 60 प्रतिशत अंक लाने वाले ही पात्रता सूची के लिए अर्ह होंगे। एआरपी का कार्यकाल एक वर्ष का होगा। चयनित एआरपी को का पदस्थापन काउंसलिग के माध्यम से मेरिट-वरिष्ठतम के क्रम में किया जाएगा।
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