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ऑपरेशन थिएटर, अल्ट्रा साउंड बंद, शोपीस बनी है ब्लड कंपोनेंट मशीन

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सरकारी ट्रामा सेंटर के आपरेशन थ्येटर कक्ष में बंद पडी मशीनें - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज में शामिल होने बाद भी जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज के नाम पर खानापूरी हो रही है। यहां संसाधन तो भरपूर हैं लेकिन उनका उपयोग नहीं हो रहा है। सरकारी ट्रामा सेंटर में ऑपरेशन थिएटर बंद पडा है। अल्ट्रासाउंड मशीन भी चालू नहीं। ब्लड कंपोनेंट मशीन भी पैक पड़ी है। मानव संसाधन की कमी भी मेडिकल कॉलेज को खल रही है। इसका भरपूर लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है।
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ट्रामा सेंटर में अल्ट्रासाउंड मशीन तीन माह से बंद पड़ी हुई है। क्योंकि यहां रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। अगर इमरजेंसी में किसी का अल्ट्रासाउंड कराया जाए तो उसे प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में संसाधन होते हुए भी मरीजों को सुविधा नहीं मिल रही है। वहीं, ट्रामा सेंटर में लाखों रुपये खर्च करके आधुनिक ऑपरेशन थियेटर बनाया गया। दो, चार आपरेशन होने के बाद ऑपरेशन थिएटर बंद पड़ा है।
गंभीर मरीजों को सीधे आगरा रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में ट्रामा सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न हो पाने के कारण ऑपरेशन थियेटर के उपकरण धूल फांक रहे हैं। ट्रामा सेंटर में लाखों रुपये से खरीदी गई एक्स-रे मशीन शोपीस बनकर रह गई है। यहां कक्ष में ताला पड़ा हुआ है। अगर दुर्घटना में किसी मरीज का फ्रैक्चर हो जाए तो एक्स-रे आपातकालीन स्थिति में होना मुश्किल है।
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लाइसेंस मिला नहीं, धूल चाट रही कंपोनेंट रक्त की मशीन
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को आधुनिक बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो गए हैं। कंपोनेंट रक्त अस्पताल में ही उपलब्ध हो, इसके लिए कई मशीनें आ गई हैं। लेकिन इसका लाइसेंस न मिल पाने के कारण यह व्यवस्था शुरू नहीं हो चुकी है। मरीजों के तीमारदार कंपोनेंट ब्लड लेने के लिए प्राइवेट ब्लड बैंकों के चक्कर लगाते हैं। ब्लड बैंक में रखी मशीनें महीनों से धूल फांक रही हैं।
तीन रेडियोलॉजिस्ट में दो हो गए सेवानिवृत्त
पहले हमारे पास तीन रेडियोलॉजिस्ट थे, उनमें से दो सेवानिवृत्त हो गए। इसलिए एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के लिए एक ही स्टाफ है। ऑपरेशन थियेटर हमारे पास कई हैं। मरीज की सुविधाओं को देखते हुए अन्य ऑपरेशन थिएटर प्रयोग किया जाता है। ब्लड बैंक का लाइसेंस मिलने के बाद कंपोनेंट ब्लड की सुविधा होगी।
डॉ. आरके पांडे - सीएमएस स्वशासी मेडिकल कॉलेज
ट्रामा सेंटर में प्रतिदिन आते हैं 170 से 200 मरीज
ट्रामा सेंटर इमरजेंसी सेवा के रूप में स्वास्थ्य विभाग की कड़ी है। इसमें 170 से 200 मरीज प्रतिदिन आते हैं। 24 घंटे आपातकालीन सेवा चालू रहती है। सर्वाधिक मरीज घायल अवस्था में आते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते अधिकांश मरीजों को आगरा ट्रांसफर किया जाता है।
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