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अहंकार पालने वाले को नहीं मिलता स्वर्ग : जैनाचार्य

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अहंकार पालने वाले को नहीं मिलता स्वर्ग : जैनाचार्य
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फिरोजाबाद। रत्नत्रय दिगंबर जैन मंदिर नसियाजी में बुधवार को विवेकसागर महाराज ने प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि जीवन में अनुशासन जरूरी है। अनुग्रह के साथ विग्रह भी जरूरी है। जीवन में अहंकार पालने वाले को कभी स्वर्ग नहीं मिल सकता। दया, संयम पर चलने वाला स्वर्ग का अधिकारी है। यदि जीवन में कभी भी क्रोध आए तो रुक जाएं।
जैन आचार्य ने कहा कि जीवन में किसी का प्रेम पाना है तो झुक जाओ। रामकथा, भागवतकथा, महावीर वाणी सुनने से जीवन में परिवर्तन तब तक नहीं आएगा जब तक खुद के जीवन की व्यथा और कथा नहीं सुनेंगे। महापुरुषों के आचरण को अपने जीवन में उतारें। क्रोध व्यक्तिगत समस्या है जिसने इस पर विजय पा ली वह परमात्मा बन जाएगा। गुरु यदि शिष्य पर क्रोध करता है तो वह शिष्य के बदलाव के लिए, मां यदि बच्चों पर करती है तो बदलाव के लिए, इनके क्रोध में भी भलाई छिपी रहती है। केवल भगवान महावीर, राम की जय जयकार न करें उनकी वाणी को भी जीवन में उतारें।
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जैनाचार्य ने कहा कि क्रोध एक ऐसी बीमारी है जिससे मानव खुद का दुश्मन बन जाता है। यदि वह क्षमा का भाव रखे तो वह दूसरों को भी अपना बना सकता है। सफलता के लिए धर्म कि राह पर चलें।
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