नगर आयुक्त के कार्यालय में एकत्रित पार्षद।
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फिरोजाबाद। 14वें वित्त की धनराशि से शहर में होने वाले विकास कार्य खींचतान में फंसे हैं। कहां क्या कार्य होने हैं इसकी जानकारी पार्षदों को नहीं है। मंगलवार को जब पार्षद इसकी जानकारी करने नगर आयुक्त के पास पहुंचे, लेकिन जानकारी न मिलने पर पार्षद भड़क गए। पार्षदों का नगर निगम के अधिकारियों से विवाद हो गया। पार्षद काफी देर तक नगर आयुक्त के कक्ष में डेरा डाले रहे।
शासन शहर के विकास के लिए वित्त आयोग से करोड़ों की धनराशि देता है। किस्तों में यह धनराशि हर साल नगर निगम को मिलती है। एक महीने पहले 14वें वित्त के करीब 15 करोड़ रुपये शासन से मिले हैं। इससे पहले का बजट भी नगर निगम के खजाने में पड़ा है। टेंडरों को लेकर खींचतान कुछ ऐसी है कि वर्ष 2018 तक के काम अब तक नहीं हो पाए हैं।
वित्त आयोग से मिली धनराशि से होने वाले कार्य पहले मंडलायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी किया करती थी। निकाय अधिनियम में हाल ही में किए संशोधन के अब यह अधिकार महापौर की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा किया जाता है। इस कमेटी में महापौर के अतिरिक्त डीएम, नगर आयुक्त और विकास प्राधिकरण के अधिकारी भी शामिल हैं। दो दिन पहले कमेेटी की बैठक में 14वें वित्त से होने वाले कार्यों पर मंथन किया गया। बैठक में कार्यों का खाका खींच लिया गया है, लेकिन अभी इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मंगलवार को पार्षद अभिनेंद्र यादव, सुभाष यादव, मीरा शर्मा, निहाल सिंह, संतोष राठौर, इरशाद, काशिम, सत्येंद्र, तोताराम, सत्यपाल नगर आयुक्त विजय कुमार से मिलने के लिए उनके कक्ष में पहुंचे। पार्षदों ने 14वें वित्त आयोग से मिली धनराशि से कराए जाने वाले कार्यों के बारे में जानकारी मांगी। जानकारी न मिलने पर पार्षदों में आक्रोश फैल गया। पार्षदों के नाराजगी जताने पर नगर आयुक्त ने कुछ भी कहने से मना कर दिया।