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विदेश भेजने हैं 300 करोड़ रुपये के आर्डर, निर्यातकों को नहीं मिल रहे कंटनेर

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विदेश भेजने हैं 300 करोड़ रुपये के आर्डर, निर्यातकों को नहीं मिल रहे कंटनेर
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- केंद्रीय जल परिवहन मंत्रालय में लगाई गुहार, शर्तों के अनुसार, 21 दिन में माल गंतव्य तक भेजना है
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। विदेेशों से मिले करीब 300 करोड़ रुपये के आर्डर भेजने के लिए कांच निर्यातकों को कंटेनर नहीं मिल रहे हैं। निर्यातकों का कहना है कि आर्डर की शर्तों के मुताबिक उन्हें 21 दिन में माल गंतव्य तक पहुंचाना है। समय से माल न पहुंचने से इकाइयों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही हैं। कांच उद्योग से जुड़े निर्यातकों ने केंद्रीय जल परिवहन मंत्रालय को पत्र लिखकर कंटनेर की व्यवस्था सुचारु रखने की मांग की है।
फिरोजाबाद के कांच निर्यातकों व हस्तशिल्पियों के पास इस समय पोलैंड,स्वीडन,अमेरिका और आस्ट्रेलिया आदि देशों के आर्डर हैं। ताजा स्थिति के अनुसार एक-एक कंटेनर के लिये निर्यातकों को 15 से 30 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। जबकि गंतव्य तक माल पहुंचाने के लिए जहां 21 दिन लगते थे, अब दो से तीन माह तक लग रहा है।
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समय से आर्डर पूरा नहीं होने से आर्थिक नुकसान भी
करोड़ों रुपये के कांच उत्पाद को तैयार कराने एवं गंतव्य तक पहुंचाने के लिये निर्यातकों को बैंक या अन्य स्रोतों से ऋण या मदद लेनी पड़ती है। विदेशों तक समय से कांच उत्पाद की सप्लाई नहीं होने के कारण कांच निर्यातक व हस्तशिल्पियों को बैंक ऋण पर लगने वाली अतिरिक्त ब्याज जैसी आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।
तीन गुना तक बढ़ चुका है कंटेेनर का भाड़ा
कांच उत्पादों के निर्यातकों की मानें तो जनवरी 2022 में अमेरिका में माल भेजने पर प्रति कंटेनर करीब 4000 डॉलर प्रति कंटेनर का भाड़ा लगता था। अब अमेरिका माल भेजने के लिये प्रति कंटेनर 13,000 रुपये डॉलर का भाड़ा अदा करना पड़ रहा है। इसी तरह के से यूूरोप के अन्य देेशों में भी माल भाड़ा तीन गुना तक बढ़ गया है।
- आर्डर के हिसाब से कांच उत्पाद तैयार कराने के बाद उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने के लिये कंटेनर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। नियमानुसार आर्डर फाइनल होने के 21 दिन में माल गंतव्य तक पहुंचाना होता है। जब कंटेनर नहीं मिल रहे हैं तो विदेशी ग्राहकों से अतिरिक्त समय की मांग करनी पड़ती है। ताजा स्थिति यह है कि दो माह पूर्व विदेशों को भेजे कई उत्पाद अभी भी रास्ते में अटके हैं।
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- मुकेश बंसल टौनी, चेयरमैन, द मैन्यूफैक्चरर एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन
पहले अमेरिका,पौलेंड और स्वीडन आदि देेशों में 15 दिन के भीतर आर्डर की सप्लाई हो जाती थी। अब माल विदेशी ग्राहकों तक कब पहुंचेगा, यह निश्चित नहीं होता है। समय से सप्लाई नहीं पहुंचती तो फिर आर्थिक बोझ भी हमारे ऊपर बढ़ जाता है। कई देशों में माल भेजने के लिए कंटेनर नहीं मिल रहे हैं, इसके लिए केंद्रीय जल परिवहन मंत्रालय को चार अप्रैल को पत्र भेजा गया है।
- राजेद्र कुमार गुप्ता, कांच उत्पादों के निर्यातक
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