100 शैय्या मातृ एवं शिशु चिकित्सालय के सामने ओपीडी में खून की जांच कराने के लिए जमीन पर लेटे बीमार ब?
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फिरोजाबाद। अपने कलेजे के टुकड़े का इलाज कराने के लिए मां की रात आंखों में कट रही है। रात भर जागकर मां जहां लाल का ख्याल रख रही है। वहीं पिता रात तीन बजे घर से निकल कर चिकित्सक की क्लीनिक अथवा आवास पर नंबर लगाने पहुंच रहे है। सुहागनगरी कुछ इसी तरह का माहौल आज कल देखने को मिल रहा है। बाल रोग चिकित्सकों की क्लीनिक अथवा आवास। सभी जगह मरीजों की भीड़ है। बच्चे को लेकर पहुंचे रहे माता-पिता जमीन पर बैठने के लिए विवश है तो बुखार से तप रहे बच्चे को जमीन पर ही चादर बिछाकर लिटा लेते हैं।
जिला अस्पताल और सौ शैय्या अस्पताल में बुखार और डेंगू से पीड़ित मरीजों के आने की संख्या कम हो गई हो। लेकिन डेंगू और बुखार का प्रकोप थम नहीं है। क्लब चौराहा स्थित बाल रोग विशेष को लाल के दिखाने के लिए जहां सुबह पांच बजे ही माता पिता लाइन में लगे नजर आते है। जबकि चिकित्सक के बैठने का समय लगभग 11 बजे का है। जिला अस्पताल के सामने बाल रोग विशेषज्ञ के यहां भी देररात तक लाइन लगी रहती है।
गांधीपार्क चौराहा के समीप बालरोग विशेषज्ञों के यहां भी इन दिनों काफी भीड़ रहती है। इन बाल रोग विशेषज्ञों के यहां सुहागनगरी से नहीं जिले भर से मरीज आते है। जबकि शहर के प्रसिद्ध बालरोग विशेषज्ञ जो मेडिकल कॉलेज के एकमात्र बाल रोग चिकित्सक हैं, वह ड्यूटी पूरी करने के बाद सेंट्रल चौराहे के पास स्थित अपने घर पर अलसुबह चार से आठ बजे व शाम सात से रात 11 बजे तक मरीजों को देख रहे हैं। इसके साथ ही वह कई नर्सिग होम में भी मरीजों को देखने जा रहे हैं।
डेंगू और वायरल के प्रकोप में जहां माता पिता परेशान हैं, वहीं कुछ चिकित्सक भी तीमारदारों को लंबा चौड़ा दवाई का पर्चा थमा रहे हैं। बुखार के मरीजों को पांच से छह प्रकार की दवा लिखी जा रही है। सूत्रों की माने तो यह दवा चिकित्सक इसलिए लिखते हैं, क्योंकि दवा कंपनी में कमीशन पचास से साठ फीसदी तक मिलता है।
शहर के कुछ प्रमुख चिकित्सकों ने डेंगू और वायरल के बीच अपनी परामर्श शुल्क में भी इजाफा कर दिया है। जहां अभी तक दो सौ रुपये फीस जो चिकित्सक लिया करते थे, उन चिकित्सकों ने अब फीस बढ़ाकर चार सौ रुपये कर दिया है। जिससे तीमारदारों की जेब पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।