रफ़रोजाबाद ! विभव नगर स्थित जैन मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु
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फिरोजाबाद। दशलक्षण पर्व के चौथे दिन सोमवार को श्रद्घालुओं में पूजा-अर्चना के लिए उत्साह रहा। भक्तों ने विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना की। मंदिरों में सुबह से लेकर शाम तक धार्मिक अनुष्ठान होते रहे। जैनाचार्यों ने चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की चर्चा की गई। वहीं शाम के समय जैन मंदिरों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
नसियाजी मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य विवेक सागर महाराज ने कहा कि आज धर्म का चौथा दिन है। पहले तीन दिन में हमने क्रोध, मान, माया तीन कषाय की चर्चा की। हम उनका कैसे त्याग करे, इसे चौथे धर्म उत्तम शौच में बताया है। मुनि महाराज ने कहा कि शौच धर्म का अर्थ है पवित्रता, आत्मिक शुद्धि। बाह्य शुद्धि से हमारे क्रियाकलापों पर कोई खास प्रभाव नही आता। मन शुद्ध नहीं होने पर हमारी सभी क्रिया दिखने में सही होंगी लेकिन अशुद्ध रहेगी। अशुचि का दूसरा पक्ष लोभ से लिया जाता है।
धन आदि वस्तुएं ये मेरी है आदि लोभ बढ़ाने वाली है। धनवान व्यक्ति धन को भोगता है। संसार में धन को छोड़ोगे तभी तो भोग पाओगे। धन को छोड़ोगे नही तो भोग भी नही पाओगे। लोभ की प्रमुख जड़ है तृष्णा। दुख की ज्वाला तृष्णा की भट्ठी में से निकलती है। उत्तम शौच धर्म को अपना लें और अपने जीवन सुखी बना ले। इधर, छदामीलाल जैन मंदिर में मुनिश्री सुरत्न सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पूजा-अर्चना की गई। शांतिधारा के बाद इंद्र-इंद्राणी स्वरूपों द्वारा शांतिनाथ विधान में पूजा-अर्चना की गई। शाम को भी मंदिर में प्रश्नमंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।