मानक अधूरे फिर भी 50 वाहनों को जारी हो गया फिटनेस प्रमाण पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। परिवहन विभाग के अफसरों की जांच में स्कूली बसों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में लापरवाही सामने आई है। मानक पूरे न होने के बाद भी विभाग द्वारा उनको फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।
विधानसभा चुनाव के लिए अधिग्रहीत की गई स्कूलों की बसों की जब एआरटीओ प्रशासन द्वारा जांच की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। विभाग में पंजीकृत करीब 1007 बसों में से अधिकांश बसों की फिटनेस नहीं थी। बस मालिकों को जब विभाग द्वारा नोटिस जारी किए तब कहीं जाकर 350 बस मालिक बसों की फिटनेस कराने के लिए विभाग के दफ्तर पहुंचे। इनमें भी मानक पूरे न होने पर विभाग द्वारा फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसका खुलासा मेरठ और गाजियाबाद में हुए हादसे के बाद जब विभागीय अफसर बसों की जांच करने पहुंचे तब हुआ। इसके बाद विभागीय अफसरों ने वाहन स्वामियों पर शिकंजा कसते हुए उनको सीज करने के साथ ही चालान करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
यह होने चाहिए मानक
खिड़कियां शीशे से पैक न होे, साथ ही जाली भी लगी हो।
आपात कालीन खिड़की के दो फीट दायरे में कोई भी सीट न लगी हो।
सीसीटीवी कैमरा ऐसी जगह लगा हो, जहां से पूरी बस का दृश्य दिखाई देता हो।
जीपीएस सिस्टम लगा हो, बसों का रंग पीला होना चाहिए।
प्रमाण पत्र के लिए खानापूरी
फिटनेस प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए कई बसों में मानक पूरे करने को सिर्फ खानापूरी की गई। इसमें किसी की खिड़की पर ग्रिल लगी है तो किसी पर नहीं। चेकिंग के दौरान 50 से अधिक बसें ऐसी मिली, जिनके खिलाफ सहायक संभागीय परिवहन विभाग के अफसरों को कार्रवाई करने को बाध्य होना पड़ा।
स्कूली वाहनों के खिलाफ पिछले दस दिनों से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सौ से अधिक बसों के चालान केवल इसलिए कर दिए गए कि वाहन स्वामी द्वारा मानक पूरे नहीं मिले और न ही फिटनेस प्रमाण पत्र था। कई स्कूली वाहन ऐसे भी मिले जिनका मानक पूरा नहीं था फिर भी फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसकी जांच कराई जाएगी।
- राजेश कर्दम एआरटीओ प्रशासन