फोटो 19शास्त्री मार्केट में प्रथम तल का जर्जर गलियारा। संवाद
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फिरोजाबाद। सदर बाजार स्थित करीब पांच दशक पुराना ऐतिहासिक शास्त्री एवं चंद्रशेखर आजाद मार्केट अब आधिकारिक रूप से जर्जर घोषित होने की कगार पर है। नगर निगम प्रशासन ने बड़े हादसे की आशंका के मद्देनजर जल्द ही एक तकनीकी कमेटी गठित कर पूरे मार्केट परिसर का सर्वे कराने का निर्णय लिया है। सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। बीते मंगलवार को प्रथम तल की छत का प्लास्टर भरभराकर गिरने से प्रशासन हरकत में आया, लेकिन राहत की बात रही कि साप्ताहिक बंदी के कारण उस समय बाजार में भीड़ नहीं थी और एक बड़ा हादसा टल गया।
नगर निगम ने अप्रैल माह में 250 दुकानों की क्षमता वाले इस प्रमुख व्यावसायिक केंद्र के पुनर्विकास और नव-निर्माण के लिए करीब 32 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी कार्ययोजना तैयार की थी। हालांकि, स्थानीय व्यापारी संगठनों और दुकानदारों के भारी विरोध के आगे यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी और निगम दफ्तर की फाइलों में ही सिमटकर रह गई। दूसरी ओर, भूतल के गलियारों और प्रथम तल के छज्जों पर दुकानदारों की ओर से किए गए अवैध निर्माण और अतिक्रमण की आड़ में जर्जर हो चुकी छतें छिप गई हैं, जिससे मरम्मत कार्य में भी बड़ा रोड़ा अटक गया है।
सुरक्षा बनाम व्यापारिक हितों का टकराव
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू जनसुरक्षा और व्यापारिक हितों के बीच उलझा प्रशासन है। नगर निगम के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मार्केट की संरचनात्मक स्थिति इतनी खस्ता हो चुकी है कि लोहे की सरिया पूरी तरह गल चुकी हैं और प्लास्टर रोजाना उखड़ रहा है। लोगों की मानें तो इस तरह की संरचनाओं में प्लास्टर का गिरना महज शुरुआती चेतावनी है। बीम और खंभों के कमजोर होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यदि व्यापारी पुनर्विकास योजना पर सहमत नहीं होते, तो सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए मार्केट को तत्काल खाली कराने और अस्थायी रूप से सील करने जैसे कठोर कदम उठाने की नौबत आ सकती है। तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट ही तय करेगी कि इस ऐतिहासिक मार्केट का भविष्य क्या होगा।
शास्त्री मार्केट और चंद्रशेखर आजाद मार्केट पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। पूर्व में इस संबंध में दुकान आवंटियों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। जल्द ही एक तकनीकी कमेटी गठित कर मार्केट को आधिकारिक रूप से जर्जर घोषित किया जाएगा और विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
- आरपी सिंह, मुख्य अभियंता, नगर निगम