फोटो 22, ऑपरेशन करते चिकित्सक। स्रोत: मेडिकल कॉलेज
फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में दुर्लभ मामला सामना आया है। 40 वर्षीय महिला के गर्भ सामान्य रूप से बच्चेदानी में न होकर पूर्व में हुए सिजेरियन ऑपरेशन के पुराने घाव में ठहरा हुआ था, जिससे महिला की जान को गंभीर खतरा बना हुआ था। स्त्री रोग विभाग की टीम ने ऑपरेशन कर महिला की जान बचा ली।
महिला के दो बच्चे सिजेरियन से हुए थे। सिजेरियन के घाव में महिला को गर्भ ठहर गया। वह करीब दो महीने की गर्भवती थी। महिला की हालत बिगड़ने लगी। क्योंकि भ्रूण गर्भ में नहीं था। महिला की हालत नाजुक होने पर उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर आपात उपचार शुरू किया गया। स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डा. प्रेरणा जैन के नेतृत्व में डाॅ. शिप्रा और डाॅ. दिव्या चौधरी की टीम ने समय रहते ऑपरेशन कर महिला की जान बचा ली। डाॅ. प्रेरणा जैन ने बताया कि इस स्थिति में गर्भाशय के पुराने ऑपरेशन के निशान में भ्रूण ठहर जाता है, जिससे गर्भाशय फटने और अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि सिजेरियन प्रसव की संख्या बढ़ने के कारण ऐसे मामलों में वृद्धि हो रही है, इसलिए गर्भधारण के शुरुआती समय में जांच बेहद जरूरी है। प्राचार्य डाॅ. योगेश सिंघल ने बताया इसे रप्चर्ड एक्टोपिक प्रेगनेंसी कहते हैं। सर्जरी नहीं होने पर गर्भवती मिहला की जान का खतरा रहता।