फिरोजाबाद। सितंबर के दूसरे पखवाड़े में नेचुरल गैस के दाम बढ़ने की आशंका से कांच एवं चूड़ी कारखानेदारों की धड़कनें तेज हो गई हैं। कोरोना की मार के बाद छाई मंदी के बाद शहर में फैले डेंगू और वायरल बुखार के कारण कांच कामगार काम पर नहीं पहुंच रहे। ऐसे में नेचुरल गैस के दामों में बढ़ोत्तरी से कांच चूड़ी उद्योग जगत में बंदी का संकट गहरा सकता है।
कांच कारखानों में खपने वाली नेचुरल गैस के दाम लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। अगस्त से लेकर नेचुरल गैस के दामों में करीब तीन रुपये प्रति घनमीटर की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। इसके बाद भी गैस कंपनियों द्वारा आगामी दिनों में पीएनजी और सीएनजी गैस के दामों की समीक्षा करने की बात कही जा रही है।
समीक्षा के बाद नेचुरल गैस के दामों में औसतन 10 से 11 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। इस कारण दीपावली व अन्य त्योहार के अलावा बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका आदि देशों में कांच चूड़ी की आपूर्ति को लिए ऑर्डर को पूरा कराने में कारखानेदारों व गोदाम स्वामियों को बड़ा घाटा उठाना पड़ेगा। इसके साथ ही स्थानीय बाजारों में मंदी के बीच चूड़ी के दाम बढ़ने से डिमांड कम हो जाएगी।
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सरपट दौड़ रहे उत्पादन के पहिये पर लग सकते हैं ब्रेक
कोरोना काल से उबरने के बाद कांच चूड़ी कारखानों में उत्पादन की प्रक्रिया तेज है। हालांकि कामगारों अनुपस्थिति का संकट भी है लेकिन कारखानेदार एवं चूड़ी गोदामों में दीपावली के ऑर्डर पूरा कराने में जुटे हैं। ऐसे में यदि गैस के दामों में बढ़ोत्तरी हुई तो पूरी कवायद पर पलीता लग सकता है।
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कारखानों में खपने वाली नैचुरल गैस एक नजर-
-सस्ती दर की नैचुरल गैस का निर्धारित कोटा-11 लाख घनमीटर
- कारखानों में हर माह फुंकने वाली गैस--30-35 लाख घनमीटर लगभग
- उत्पादन प्रक्रिया सुचारू वाले कांच चूडी कारखाने-80-90
-इसके अलावा माउथ ब्लोइंग व बोतल इंडस्ट्रीज---- 65
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कारखानेदारों की बात-
ओएनजीसी व अन्य तेल व गैस कंपनियां साल में दो बार नेचुरल गैस के दामों की समीक्षा करती हैं। स्थानीय कांच कारखानों में उत्पादन प्रक्रिया तेजी पर है। ऐसे में नेचुरल गैस के दाम स्थानीय खपत के अनुसार बढ़ेंगे। तेल व गैस कंपनियों द्वारा तय होने वाली नई दरों में इजाफा होने की आशंका है। गैस के दाम बढे़ तो कुटीर उद्योग के रूप में संचालित चूड़ी उद्योग धराशायी हो जाएगा।
संजय जैन घंटू कारखानेदार