तीन पेज का सुसाइड नोट
लिपिक ने बृहस्पतिवार की रात ही एक साढ़े तीन पेज का सुसाइड नोट लिखा था। जिसमें अंतिम शब्द रात 1:27 बजे लिखा गया। जिसमें लिखा है कि लिपिक के पिता भी इस विभाग में तैनात थे। जिनका 2005 में निधन हो गया था। मृतक आश्रित के रूप में उसकी नौकरी लगी थी। वह नवंबर 2005 से नौकरी कर रहे हैं। तत्कालीन जिला उद्यान अधिकारी बलजीत सिंह की कार्यशैली की सराहना करते हुए लिखा है कि वर्ष 2017 में उनका तबादला होने के बाद उनसे भी अपना तबादला कराने का प्रयास किया सफलता नहीं मिली। उसके खिलाफ उप निदेशक उद्यान आगरा मंडल से कुछ किसानाें के नाम झूठी व फर्जी शिकायत कराई गई।
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तीन दिन से सो नहीं सका
शिकायती पत्र पर किसी शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर अंकित नहीं था। इस संयुक्त पत्र में उसकेे खिलाफ आरोप लगाए गए थे। तत्कालीन जिला उद्यान अधिकारी डा. संजीव कुमार वर्मा के कार्यकाल में ही इन सभी का निस्तारण करा दिया गया था। फिर भी कुछ अधिकारी उसके खिलाफ पत्र लिख कर उसका मानसिक उत्पीड़न करते रहे। इस कारण वह तीन दिन से नहीं सो सके। उसे यह पता है कि उसके आत्महत्या करने से उसकी पत्नी-बच्चों को नौकरी नहीं मिलेगी, बच्चाें की पढ़ाई भी रुक सकती है। किंतु वह और अधिक अपना टार्चर सहन नहीं कर सकता। आगरा मंडल स्तरीय एक अधिकारी उसे निलंबित करने की साजिश रच रहे हैं। इसलिए यह पत्र घर पर छोड़ कर वह आत्महत्या करने जा रहा है। वह अपने परिवार से क्षमाप्रार्थी है। सभी को राम-राम। सादर प्रणाम।
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