फिरोजाबाद। ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) ने फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर प्रत्याशी उतारने का फैसला लेकर जिले की राजनीति में नया दांव चला है। पार्टी ने यदि अल्पसंख्यक चेहरे पर दांव लगाया तो फिर सपा की मुश्किलें बढ़ना तय है। यदि किसी नए चेहरे पर दांव लगाया तो भी चुनाव काफी दिलचस्प होगा।
फिरोजाबाद लोकसभा सीट में फिरोजाबाद विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ शिकोहाबाद विधानसभा सीट पर अल्पसंख्यक वोटरों की स्थिति करीब तीन लाख के आसपास है। यही कारण है अल्पसंख्यक वोटरों पर एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना असदुद्दीन ओवैसी की नजर रहती है। इस बार के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने जिन सात लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने का फैसला लिया है। उसमें फिरोजाबाद लोकसभा की सीट भी है। इस सीट से सपा ने सपा के प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र एवं पूर्व सांसद अक्षय यादव को चुनाव मैदान में उतारा है। वह तो लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एआईएमआईएम के भी प्रत्याशी उतारने की घोषणा के साथ जिले की राजनीति में नई गरमाहट आ गई है। देखना यह होगा एआईएमआईएम इस सीट से कैसे चेहरे पर दांव लगाती है। इसके बाद राजनीतिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने यहां बबलू राठौर गोल्डी पर दांव लगाया था। उन्होंने 18898 वोट पाए थे। शिकोहाबाद विधानसभा क्षेत्र में 2630 वोट मिले थे। पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारा था। उस समय सपा प्रत्याशी अक्षय की मुश्किल बढ़ाने का काम खुद उनके चाचा शिवपाल यादव कर रहे थे। पिछले चुनाव में उन्हें 91869 मत मिले थे।
एआईएमआईएम के प्रत्याशी उतारने पर सपा को मुंह की खानी पड़ी
एआईएमआईएम के फिरोजाबाद से प्रत्याशी उतारने पर समाजवादी पार्टी को हर बार मुंह की खानी पड़ी है। 2017 के चुनाव में एआईएमआईएम के प्रत्याशी पहली बार निकाय चुनाव में उतरे थे। वह दूसरे स्थान पर रही थी। पार्टी को 56 हजार से अधिक वोट हासिल हुए थे।