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नगला तुलसी में भी प्रशासन सतर्क

Tue, 23 Dec 2014 12:09 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
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रविवार को एत्मादपुर के गांव गढ़ी संपत में धर्मांतरण के नाम पर हुए हंगामे और उससे गांव नगला तुलसी का नाम जुड़ने के बाद पुलिस प्रशासन यहां सक्रिय हो गया। सोमवार सुबह उपजिलाधिकारी श्रीराम यादव, थाना पुलिस, एलआईयू अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। विहिप और भाजपा नेता भी गांव नगला तुलसी में पहुंचे और लोगों से बातचीत की।
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ग्रामीणों ने एसडीएम को बताया कि गांव में एक साल से ईसाई मिशनरी सक्रिय है। एत्मादपुर से आने वाले एक धर्मगुरु ने प्रभु यीशु की शरण में आने पर समस्त रोग और कष्ट दूर होने का भरोसा दिलाया, साथ ही ईसाई धर्म अपनाने पर अच्छी नौकरी के साथ ही बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की बात कही।

 ईसाई धर्म से आस्था रखने एवं इलाज से सीमादेवी का पुत्र कृष्णा चलने-फिरने व बोलने लगा था तो दूसरे की किडनी सही हो गई थीं। इसी बीच बने पथवारी मंदिर को तुड़वाकर तहसील प्रशासन ने तालाब बनवा दिया था। इससे यहां के लोगों में प्रशासन के प्रति लोगों में नाराजगी थी और कुछ नाराज लोग ईसाई मिशनरी से जुड़ गए। बढ़ती आस्था के बाद गांव में सत्संग भी होने की बात कही। घर में बाइबिल और अन्य धार्मिक पुस्तकें भी हैं।
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ग्रामीणों ने कहा कि वह सत्संग में भाग जरूर लेते रहे लेकिन वे सनातन धर्म में भी पूरी आस्था रखते हैं। उन्होंने कोई धर्म परिवर्तन नहीं किया, सत्संग में भाग लेना अलग बात है। हिंदू धर्म के पर्व और पूजा पाठ भी करते हैं। महिलाओं का भी कहना है कि उन्होंने धर्म परिवर्तन नहीं किया हैं, लेकिन वे ईसाई धर्म के अनुसार पूजा-पाठ करतीं हैं।
मेरी मां को बुला दो कभी नहीं पढ़ेंगे बाइबिल
 ‘हम कभी बाइबिल नहीं पढे़ंगे और न ही पूजा-पाठ करेंगे, ...बस मेरी मां को ला दो। उसे कुछ नहीं होना चाहिए।’ यह बात धर्मांतरण का मामला बढ़ता देख सीमा की बेटी रौली ने कही। रौली का रोते हुए बुरा हाल है। रौली ने गांव में पहुंचे भाजपा नेताओं व मीडिया कर्मियों को बताया कि तहसील से आए लोग व पुलिस भी जेल भेजने की धमकी देकर गई है।

- गांव की कुछ महिलाएं अंधविश्वास का शिकार हुई हैं। परमेश्वर की धर्मसभाओं में भाग लेने के बाद उनकी समस्या का निराकरण होना उन्होंने कारण बताया है। वे धर्मसभाओं में भाग लेतीं रहीं हैं और अपने घर में भी प्रार्थना करतीं रहीं हैं। गांव में कोई धर्मपरिवर्तन नहीं हुआ है। गांव में मंदिर तोड़ने के पीछे गांव की राजनीति है। अभिलेखों में वो जगह मंदिर के नाम पर दर्ज है, जिसके बाद तालाब खोदा गया है। हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से बीच गांव में तालाब उचित नहीं है, किंतु सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार तालाब को हटाया नहीं जा सकता। उसकी बैरीकेडिंग के निर्देश दिए हैं।
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                                                  श्रीराम यादव
                                                  उपजिलाधिकारी, टूंडला

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