फोटो-19-गंगा के बाढ़ से हुई धान के खेत की कटान। संवाद
औंग। मलवां ब्लाॅक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गंगा का जलस्तर घटने से गांवों में जलभराव खत्म हो गया है, लेकिन गंगा और पांडु नदियों में कटान जारी है। रोज किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में समा रही है। इससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट गहराने लगा है।
किसान घसीटे, रामस्वरूप, धनराज और कृष्णपाल ने बताया कि पिछली बार कटान थमने से राहत मिली थी, लेकिन बाढ़ के बाद फिर जमीन नदी में समाने लगी है। अपनी उपजाऊ भूमि को नदी में समाते देखने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है। जमीन छिनने से उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। गंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार शाम 100.12 मीटर से घटकर शुक्रवार शाम 99.96 मीटर पर पहुंच गया।
इसके बावजूद कटान जारी है। राजस्व विभाग किसानों के नुकसान का ब्योरा जुटा रहा है, लेकिन कटान में जमीन गंवा रहे किसानों को मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर असमंजस बना हुआ है। किसानों का सवाल है कि कटान से हो रहे नुकसान का विवरण कब दर्ज किया जाएगा। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है, जिससे उनकी चिंता बढ़ती जा रही है।
फोटो-19-गंगा के बाढ़ से हुई धान के खेत की कटान। संवाद