सिविल लाइन में यूक्रेन से लौटे अंकित मिश्रा की आरती कर स्वागत करतीं मां नीलम मिश्रा। संवाद
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फतेहपुर। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच सुरक्षित घर लौटे छात्र अपने परिजनों से मिल कर भावुक हो गए। वहां के हालात बयां करते हुए कहा कि पुलतावा आवास से हंगरी सीमा उन लोगों को आठ बार पासपोर्ट दिखाना पड़ा। हाथ में तिरंगा और बस में तिरंगा झंडा लगाकर 24 घंटे का सफर किया। इस बीच में एक जगह पर बस रुकी, लेकिन चेतावनी सायरन बजते ही सैनिकों ने बस के अंदर कर दिया। हंगरी सीमा पर जब बस पहुंची तो उनकी दहशत कुछ कम हुई। दो दिन वहीं रहने के बाद एयर इंडिया की फ्लाइट से उन्हें दिल्ली लाया गया। वहां से फ्लाइट में बैठाकर लखनऊ फिर अपने निजी वाहन से घर आए हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति यूक्रेन से लौटे छात्रों से मुलाकात की और मिठाई खिलाकर उनका हौसला बढ़ाया।
यूक्रेन के पुलतावा में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे तीन छात्र शुक्रवार रात घर पहुंचे। सिविल लाइंस निवासी हरिश्चंद्र मिश्रा ने अपने बड़े बेटे अंकित मिश्रा को चार महीना पहले एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन भेजा था। वहीं डॉ. महेश मिश्रा के दो बेटे यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए थे। बड़े बेटे हर्ष मिश्रा ने चार साल पूरे कर लिए हैं। उसका पांचवां साल चल रहा है। वहीं छोटे बेटे उदय मिश्रा को यूक्रेन गए अभी तीन महीना हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्घ शुरू होने से हालत बिगड़े और इन लोगों को किसी तरह से घर वापसी करनी पड़ी। यह तीनों लोग एक साथ रहते थे।
इन लोगों ने बताया कि 26 फरवरी की रात बंकर में रहना पड़ा। 27 फरवरी की रात करीब 23 लोगों ने बस से हंगरी सीमा के लिए रवाना हुए। 28 फरवरी की रात हंगरी बार्डर पहुंचे और यहां पर प्राइवेट फ्लैट लेकर दो दिन रहे। तीन फरवरी को एयर इंडिया की फ्लाइट से दिल्ली भेजा गया। चार को दोपहर एक बजे दिल्ली पहुंचे और फिर फ्लाइट से लखनऊ आए। लखनऊ एयरपोर्ट से निजी वाहन में बैठकर शुक्रवार रात ढाई बजे घर पहुंचे हैं।
इन छात्रों ने बताया कि जो केंद्र सरकार व यूक्रेन की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए थे, उनमें बात नहीं हो सकी। हेल्पलाइन नंबर डायल करने में समय बर्बाद हो रहा था। जब तक सभी छात्रों की यूक्रेन से घर वापसी नहीं हो जाती है, हेल्पलाइन नंबरों में सुधार करने की जरूरत है। ताकि तुरंत फोन रिसीव हो।
तपस्वी नगर में यूक्रेन से वापस लौटे हर्ष मिश्रा को मिठाई खिलातीं केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी न?- फोटो : FATEHPUR