किशनपुर। तेज धूप और भीषण गर्मी से मवेशियों को बचाने के पर्याप्त इंतजाम अंजना भैरव गोशाला में नहीं हैं। तालाब की तली में पानी भरा है, जो तेज धूप में अधिक गरम हो जाता है। इसी कारण मवेशी गला भी तर नहीं कर पा रहे हैं। मवेशियों का पेट भरने के लिए सूखा भूसा दिया जाता है। हरे चारे और चूनी-चोकर की व्यवस्था नहीं है। भूखे मवेशी कमजोर होकर बीमार हो रहे हैं।
विजयीपुर ब्लाक के अंजना भैरव गांव की गोशाला में इस समय 83 गोवंश हैं। जबकि पहले यहां पर 108 गोवंश थे। इनमें कुछ तो बीमार होकर मर गए और कुछ गोवंशों को लोगों के सुपुर्द कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि गोवंश भूख के कारण मर रहे हैं और जेसीबी से इन्हें दफना दिया जाता है। इस गोशाला को बने हुए दो साल बीत गए हैं। तत्कालीन सीडीओ चांदनी सिंह ने गोशाला का उद्घाटन किया था।
तब से यहां पर सिर्फ एक टीनशेड ही बना है। तेज धूप से 83 मवेशियों को बचाने के लिए यह टीनशेड पर्याप्त नहीं है। धूप में मवेशी हांफते रहते हैं। वहीं, गोशाला में ट्यूबवेल लगा होने के बाद भी किसानों के ट्यूबवेल से किराया देकर पानी लिया जाता है। तालाब की तली में एक फुट पानी भरते ही ट्यूबवेल बंद कर दिया जाता है। धूप से पानी इतना गरम हो जाता है कि पीने लायक नहीं बचता है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि गोशाला की व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
गोशाला में मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए पंचायती राज विभाग व मनरेगा से करीब ढाई लाख रुपये खर्च करके ट्यूबवेल तो लगा दिया है, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी अभी तक बिजली का कनेक्शन नहीं हो सका है। ट्यूबवेल में बिजली न होने के कारण किराया देकर तालाब से पानी भराया जाता है।