भले ही प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में गोशालाएं बनाने का फरमान दो दिन पहले दिया हो। लेकिन जिले में डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने गोशालाओं का निर्माण करीब डेढ़ माह पहले ही शुरू करा दिया था। आवारा मवेशियों की समस्या को देखते हुए सभी 13 विकास खंडों में जमीन चिह्नित कर गोशालाओं का निर्माण कार्य शुरू करा दिया था। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक चालू माह के आखिर तक इनका निर्माण कार्य भी पूरा होने की उम्मीद है। जिले में अभी तक सरकारी व प्राइवेट स्तर से एक भी गोशाला संचालित नहीं है।
मनरेगा से ऐरायां ब्लाक के रोशनपुर टिकरी में 12.06 हेक्टेयर, अमौली में कुलखेड़ा 0.29 हेक्टेयर, असोथर के देवलान में 60 हेक्टेयर, बहुआ के अयाह में 11.9, शाह के 1.9, करसूमा में 5, भिटौरा के रारा में 5, हसवा के असवा बक्सपुर में 2, मलवां के शिवराजपुर में 5.6 हेक्टेयर, रावतपुर में 6.6 हेक्टेयर, तेलियानी के सलेमाबाद में 9.1 हेक्टेयर, हथगाम के विक्रमपुर में 10.44, देवमई के कौडिया में 1.97, खजुहा के डाडा अमौली में 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मनरेगा से गोशालाएं बनाई जा रही हैं। इस काम की मॉनीटरिंग उपायुक्त मनरेगा पुतान सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि तेरह ब्लाकों में गोशाला के निर्माण में मनरेगा से लगभग ढाई करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की जा रही है। बुधवार को सीडीओ चांदनी सिंह ने रारा गांव में बन रही गोशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गोशाला में आने वाले मवेशियों के लिए पेयजल के इंतजाम देखे। निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष खयाल रखने के निर्देश दिए। इन सभी का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराने की तैयारी है। प्रशासन गोशालाओं के निर्माण के लिए जिला पंचायत से भी एक करोड़ का वित्तीय सहयोग ले रहा है।
ग्राम प्रधानों की एक कमेटी संचालित करेगी गोशालाएं
गोशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों की एक कमेटी करेगी। प्रधानों को प्रशिक्षण करने के लि प्रशासन एक वर्कशाप आयोजित कर रहा है। गोशालाओं के रखरखाव और संचालन के लिए खाते खोले जाने और उनके आय-व्यय का हिसाब रखने की जानकारी दी जाएगी। इन गोशालाओ में गायों को पहुंचाने की जिम्मेदारी किसानों को दी गई है। ऐसे किसान जो गायों के खेत चर जाने से परेशान हैं, उन्हें उप कृषि निदेशक कार्यालय पंजीकृत कर रहा है। डीएम ने बताया कि प्रधानों की वर्कशाप में मुख्यमंत्री कार्यालय से प्रमुख सचिव के आने की संभावना है।