खागा। उत्तर प्रदेश की हाईटेक पुलिस जो घटनाओं की सूचना पर 7-10 मिनट के अंदर पहुंचने वाली है। ऑनलाइन एफआईआर से लेकर ऑनलाइन केस डायरी लिखने जैसी सुविधाओं से लैस है।
इसके बाद भी विभाग एक अजीबो-गरीब टोटके से घिरा हुआ है। ऐसा टोटका जो कई वर्षों थानों के अभिलेख में दर्ज होता आ रहा है और इसका सिलसिला अभी भी जारी है। आइए, पढ़ाते हैं आपको यूपी पुलिस के इस टोटके की कहानी -
फतेहपुर जनपद के 20 थाने हो या यूपी के अधिकांश थाने। यहां पहली जनवरी को लिखी जाने वाली पहली एफआईआर गुडवर्क होती है। गुडवर्क पुलिस विभाग में प्रचलित शब्द हैं इसका मतलब यह होता है कि पुलिस द्वारा किया जाने वाला अच्छा कार्य।
इसमें अवैध शराब की धरपकड़, गांजा बरामद करना, तमंचे-कारतूस को पकड़ना, गुंडा एक्ट, गैंगस्टर का मुकदमा लिखना आदि शामिल हैं। पहली एफआईआर गुडवर्क की लिखने को लेकर जब पुलिसकर्मियों से बातचीत की गई तो पता चला कि विभाग में यह माना जाता है कि साल का पहला मुकदमा अच्छा (गुडवर्क) होता है तो आने वाला समय विभाग के लिए अच्छा होता है। यह शुभ माना जाता है। इसलिए प्रयास यह होता है कि पहली एफआईआर गुडवर्क होनी चाहिए।
शुभ करने के लिए 31 की रात तैयारी
एक जनवरी को पहला मुकदमा गुडवर्क का लिखा जाए, इसके लिए पुलिस 31 दिसंबर की रात तैयारी करती है। पुलिस अधिकांश तौर पर कच्ची शराब बनाने वाले चिह्नित लोगों के यहां छापा मार कर उन्हें पकड़ लेती है। इसके साथ ही पुलिस मुखबिरों की मदद से गांजा या फिर किसी को तमंचे के साथ पकड़ती है। गुडवर्क न होने की स्थिति में पुलिस गुंडा, गैंगस्टर जैसे मुकदमों का प्रयोग भी प्रथम एफआईआर के लिए करती है।
गुडवर्क के लिए शिकायतों को रोकते भी हैं
एक जनवरी की सुबह अगर कोई छोटी-बड़ी घटना होती है। जिसे कुछ समय के लिए लिखने से टाला जा सकता है तो पुलिस उन घटनाओं को कुछ समय के लिए आगे बढ़ा देती है। इसके बाद जल्दी-जल्दी गुडवर्क के मुकदमे लिखकर रुकी घटनाओं को अगले क्रम में दर्ज करना शुरू कर देती है।
20 थानों में क्राइम नंबर 1/22 का विवरण
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कोतवाली/थाना मुकदमा व अधिनियम
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कोतवाली नगर - गैंगस्टर
हुसैनगंज - मादक पदार्थ (गांजा)
मलवा - आबकारी (शराब)
खागा - आबकारी
खखरेरू - आबकारी
धाता - आबकारी
सुल्तानपुर घोष - आबकारी
किशनपुर - एक्सीडेंट
थरियांव - आबकारी
हथगाम - आबकारी
असोथर - आबकारी
बिंदकी - आर्म एक्ट (तमंचा)
जहानाबाद - आबकारी
बकेवर - आबकारी
कल्यानपुर - धोखाधड़ी
औंग - गाली-गलौज
गाजीपुर - आबकारी
ललौली - एक्सीडेंट
चांदपुर - निर्माण तोड़ना
जाफरगंज - शून्य
कुछ थानेदारों को नहीं मिला मौका
जनपद के कुछ थानेदार ऐसे भी रहे, जिन्हें इस टोटके को लागू करने का समय नहीं मिला या फिर उन्होंने गुडवर्क करने पर रुचि नहीं दिखाई। इसमें जाफरगंज में तीन जनवरी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इसी क्रम में चांदपुर, ललौली, औंग भी शामिल हैं। जहां गुडवर्क का इंतजार नहीं किया गया।
पुलिस के गुडवर्क पर नजर
जनपद में 21 थाने संचालित हैं। इसमें महिला थाना को छोड़ दें तो 20 थाने प्रमुख हैं। इसमें 15 थानों पर पहली एफआईआर गुडवर्क की रही। जिसमें 11 थानों पर केवल शराब की धरपकड़ का मुकदमा लिखा गया। इसी तरह से एक थाने में गांजा, एक कोतवाली में गैंगस्टर का मुकदमा, एक थाने में तमंचा की धरपकड़ व एक थाने पर धोखाधड़ी के आरोपी पकड़े गए। दो थानों पर एक्सीडेंट में मौत, दो थानों पर आपराधिक मुकदमे लिखे गए। जबकि एक थाने पर कुछ नहीं हुआ।