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पहले से हत्या की योजना बनाकर खेत पहुंचा था कातिल

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फतेहपुर। ललौली थाने के कोर्रा कनक गांव की किशोरी की हत्या करने का इरादा बनाकर कातिल पहले से आए थे। हमले के दौरान आरोपी का किशोरी ने विरोध भी किया। उसके संघर्ष की कहानी खेत और आसपास के हालात बता रहे हैं।
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घटनास्थल किशोरी के घर से करीब 200 मीटर दूर है। ललौली मुत्तौर मार्ग पर कोर्रा कनक गांव लिंक मार्ग से कुछ दूरी पर शव मिलने वाला खेत हैं। बारिश की वजह से सुबह लोगों का आना-जाना कम था।
किशोरी के शौच जाने की जानकारी आरोपी को पहले से थी। हत्यारोपी पूर्व परिचित होगा। पुलिस अंदाजा लगा रही है कि किशोरी को किसी बात के लिए उसने पहले से कई बार मजबूर किया होगा।
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उसकी किशोरी ने बात नहीं मानी होगी। इसलिए वह किशोरी का पीछा करते सुबह ब्लेड लेकर खेत तक पहुंचा होगा। अंदाजा लगाया जा रहा है कि दुष्कर्म के बाद पहचान के डर से उसने किशोरी को मार डाला।
घटनास्थल खेत के बीच है। उस जगह पर करीब 10 फिट में सरसों के पेड़ टूटे पड़े थे। किशोरी जान बचाकर भागी होगी। तो चप्पलें कीचड़ में धंस गईं होंगी। शव कुछ दूरी पर मिला। आरोपी से बचाव में किशोरी ने भागने की भी कोशिश की होगी। तभी कीचड़ में उसकी चप्पलें धंस होगी।
पांच माह पहले शोहदों ने किशोरी को पीटा था
करीब पांच माह पहले शोहदों ने किशोरी की पिटाई की थी। किशोरी अपने छोटे भाई के साथ स्कूटी चलाना सीख रही थी। तब गांव के ही बाइक सवारों ने छींटाकशी की थी। किशोरी ने शोर मचाकर विरोध किया था। तब आरोपियों ने किशोरी के साथ मारपीट की थी। गांव के ही कुछ लोगों ने दोनों पक्षों को बुलाकर मामले को रफा-दफा करा दिया था।
लॉकडाउन में आया था परिवार
किशोरी परिवार के साथ दिल्ली में रहती थी। उसके पिता दिल्ली में रिक्शा चलाकर परिवार चलाते थे। लॉकडाउन में वह गांव लौट आए थे। गांव में ही किराने की दुकान खोली थी। मृतका के साथ ही उसकी बहन रहती है।
उसकी मां की मौत करीब 10 साल पहले हो गई थी। पिता ने दूसरी शादी की थी। मृतका के दो सगे भाई है। जिसमें बड़ा बंगलूरु में मजदूरी करता है। दो सौतेले भाई हैं। किशोरी हाईस्कूल में फेल हो गई थी। जिसके बाद पिता ने पढ़ाई बंद कराई थी।
सुबह किशोरी ने बकरियों का चारा लगाया था
किशोरी ने सुबह उठने के बाद बकरियों को बाहर निकाला था। इसके बाद उन्हें चारा लगाया। पिता ने बताया कि बेटी के पास मोबाइल नहीं था। घर के नंबर से ही किसी से बातचीत करती थी। उस मोबाइल पर सुबह किसी का फोन नहीं आया था। आम दिनों की तरह ही बकरियों को चारा देकर बेटी निकली थी।
ओडीएफ घोषित गांव में किशोरी के परिवार को नहीं मिला शौचालय
फतेहपुर। किशोरी की हत्या ने जिला प्रशासन के ओडीएफ गांव की पोल खोलकर रख दी है। परिवार को आवेदन के तीन साल बाद भी शौचालय नहीं मिला था। ऐसी बारिश में किशोरी को खेत नहीं जाना पड़ता और उसके साथ शायद वारदात भी नहीं होती।
कोर्रा कनक गांव को प्रशासन ने ओडीएफ घोषित कर रखा है। प्रशासन का दावा है कि इस गांव के हर घर में शौचालय है। किशोरी के पिता ने बताया कि करीब तीन साल पहले बहन ने शौचालय के लिए आवेदन किया था। इसके बाद भी शौचालय नहीं मिला। जबकि उनके पास पर्याप्त जगह घर हैं।
पूर्व प्रधान दिनेश कुमार ने बताया कि परिवार के पास जगह नहीं थी। इसलिए शौचालय का आवंटन नहीं हुआ था। वर्तमान प्रधान कुंदन लाल शर्मा ने बताया कि सूची में नाम भेजा जाएगा। बीडीओ विनय कुमार मिश्रा ने बताया गांव ओडीएफ है। मामले की जांच कराई जाएगी।
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