खागा। किशनपुर कस्बे में 18 मार्च को हुए दो पक्षों के बीच विवाद में पुलिस महकमा, सियासी चक्कों के बीच फंसकर रह गया। सत्ता पक्ष से जुड़े दोनों पक्षों को नियंत्रित करने में जिस तरह से लापरवाही बरती गई।
इसके बाद कार्रवाई का दायरा खींचकर अफसरों ने नए सवालों को जन्म दिया है। सोशल मीडिया पर सोमवार को दिनभर सवाल पूछे गए और ट्विटर पर भी सवाल पोस्ट किए गए।
गौर करने वाली बात ये है कि 18 मार्च को जब झगड़ा शुरू हुआ तो पर्याप्त पुलिस बल होने के बावजूद थाना पुलिस ने आगे बढ़कर दोनों पक्षों को नियंत्रित क्यों नहीं किया। जैसे-जैसे पुलिस बल बढ़ता गया, मारपीट और बढ़ती ही गई।
अफसर जब पहुंचे तो उन्होंने जैसे ही चेयरमैन किशनुपर को हिरासत में लेने का प्रयास किया तो पुलिस पर पथराव हुआ। इसमें एसओ हथगाम सहित कई कर्मी घायल हुए व सरकारी वाहन टूट गए।
यहां भी पुलिस ने बल का प्रयोग नहीं किया। घटना में उचित दिशा-निर्देश प्राप्त करती रही। चर्चा रही कि दोनों पक्ष सत्ता पक्ष से जुड़े हुए हैं, इस कारण पुलिस ने इस मामले को बैकफुट से नियंत्रित करने का काम किया।
घटना शांत हुई तो पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह ने उप निरीक्षक अरविंद यादव, सिपाही मदनलाल, बिरजू यादव, बृजमोहन को निलंबित कर दिया। जबकि थानाध्यक्ष के खिलाफ जांच के निर्देश दिए।
निलंबन होते ही सोशल मीडिया में लोगों ने इसे कार्रवाई को गलत बताते हुए सवाल उठाए। पुलिस कर्मियों की ओर से भेदभाव का आरोप लगाते हुए ट्विटर पर सवाल पोस्ट किए गए।
ट्विटर पर पूछा गया सवाल
ट्विटर पर निलंबित पुलिसकर्मियों की ओर से कार्रवाई में भेदभाव का आरोप लगाया गया। कहा गया कि निलंबित सिपाहियों की ड्यूटी घटनास्थल पर नहीं थी, बावजूद इसके उन्हें दंडित किया गया।
इस पर जिला पुलिस ने स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि अरविंद यादव व आरक्षी मदन लाल हल्का नंबर एक यानी सरौली गांव में नियुक्त थे। इसी तरह से सिपाही बिरजू यादव व बृजमोहन हल्का नंबर चार में नियुक्त थे, जो कस्बा किशनपुर आता है। 18 मार्च को दोनों कस्बे में कोबरा मोबाइल ड्यूटी पर थे।
तो एसओ को माफी क्यों
पुलिस अधीक्षक ने हल्का प्रभारी व कोबरा ड्यूटी को निलंबित करके थानाध्यक्ष के खिलाफ जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद यह प्रश्न उठता है कि थानाध्यक्ष पर पूरे क्षेत्र का जिम्मा है। उनकी ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार वह घटनास्थल पर भी मौजूद थे, ऐसे में उन पर कार्रवाई न करके केवल जांच के निर्देश क्यों दिए गए। क्या जांच के बाद कार्रवाई हो सकती थी।
आरोपियों के संग घूमे अधिकारी, कैसा न्याय
किशनपुर कस्बे के हालात को सामान्य करने के लिए अधिकारियों ने रविवार को शांति समिति की बैठक की। इसके बाद दोनों पक्ष के मुख्य लोगों को गले मिलाकर, एक दूसरे के हाथ से मिठाई खिलाई। इसके बाद कस्बे में भ्रमण हुआ। इस भ्रमण को लेकर भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई। इसमें कहा गया कि एक ओर पुलिस अस्पताल से डिस्चार्ज होने से पहले घायलों को पकड़कर जेल भेज रही है। वहीं थानाध्यक्ष आशुतोष सिंह के दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोपी बने सरौली प्रधान अतुल सिंह, चेयरमैन किशनपुर और डीएम और एसपी के साथ ही भ्रमण करते रहे। कानून का शिकंजा उन पर क्यों नहीं कसा गया।