फतेहपुर। अगले सत्र से आंगनबाड़ी केंद्रों में शैक्षिक गुणवत्ता का मानक तय हो गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का काम पोषाहार वितरण के साथ बच्चे को तय मानक के अनुरूप गुणवत्ता परक शिक्षा देना भी होगा।
इन बच्चों को 10 तक के अंकों के ज्ञान के साथ आकृतियों के घटाने का मानक निर्धारित है। मिशन प्रेरणा का नाम बदलकर निपुण भारत किया गया है। जिसमें कक्षा एक से तीन तक पाठ्यक्रम के मानक में परिवर्तन हुआ है।
बेसिक शिक्षा विभाग में अभी तक मिशन प्रेरणा के तहत पाठ्यक्रम निर्धारित था। प्रधानमंत्री के निर्देश पर मिशन प्रेरणा का नाम बदलकर निपुण भारत कर दिया गया है।
इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री प्राइमरी का दर्जा मिला है। इनमें पढ़ने वाले बच्चों को एक से 10 तक के अंकों का ज्ञान के साथ पांच अक्षर के सरल शब्द पढ़ने का पाठ्यक्रम निर्धारित है।
इसका नाम बाल वाटिका तय किया गया है। इसके पीछे कक्षा एक में प्रवेश के पहले बच्चे को अंक और अक्षर का ज्ञान कराना है। एक से पांच साल के बच्चों को खेल आधारित शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है।
निपुण भारत की निगरानी के लिए ब्लाक स्तर पर टास्कफोर्स गठित होगा, जिसमें बीईओ अध्यक्ष होंगे। सीडीपीओ और भाषा और गणित के विशेषज्ञ दो-दो शिक्षक शामिल होंगे। बीएसए शिक्षक नामित करेंगे।
निपुण भारत में भाषा के पाठ्यक्रम का मानक
प्री प्राइमरी - अक्षरों और संगत ध्वनियों की पहचान। कम से कम पांच अक्षर वाले सरल शब्दों का पढ़ना।
कक्षा 1 - ऐसे छोटे वाक्य जो आयु के अनुसार किसी अज्ञात पाठ का भाग हो, जिसमें चार-पांच शब्द हों।
कक्षा 2 - 45 से 60 शब्द प्रति मिनट प्रवाह के साथ पढ़ना।
कक्षा 3 - न्यूनतम 60 शब्द प्रति मिनट प्रवाह के साथ पढ़ना।
निपुण भारत में गणित के पाठ्यक्रम का मानक
प्री-प्राइमरी - 10 तक अंकों का ज्ञान।
कक्षा 1 - 99 तक की संख्या लिखना, पढ़ना। सरल जोड़ और घटाना।
कक्षा 2 - 999 तक की संख्या लिखना, पढ़ना। 99 तक की संख्याओं का घटाना।
कक्षा 3 - 9999 तक की संख्या लिखना, पढ़ना। सरल गुणा हल करने की क्षमता।