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कपडे़ पर पेंट करके बनाया तिरंगा, बस में लगाया

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यूक्रेन से लौटे निशांत सिंह से मिलते विवेक सिंह व अन्य। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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धाता। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की आशंका थी, लेकिन यकीन नहीं था कि इतनी जल्दी हमले शुरू हो जाएंगे कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिलेगा। युद्ध हुआ और भारतवंशियों को वापस आने के लिए कहा गया तो आनन-फानन में बस बुक हुई। खाने का सामान तो उठा लिया। सरकार ने निर्देश दिए थे कि बस में बड़ा तिरंगा लगाया जाएगा। झंडा प्रिंट नहीं हो सके तो सफेद कपड़े पर पेंट से झंडा बनाकर उसे बस पर लगाया गया। यह आपबीती रविवार को घर लौटे घोषी-बेलाई गांव के छात्र निशांत सिंह लोगों को बताई।
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धाता इंटर कॉलेज के शिक्षक सतीश चंद्र सिंह के पुत्र निशांत सिंह 25 फरवरी को युआनो शहर से बस से निकला और 27 को रोमानिया सीमा पहुंचा। यहां से फ्लाइट के माध्यम से एक मार्च को दिल्ली और फिर दो मार्च को आगरा निवासी योगेंद्र सिंह अपने चाचा के पास आ गए। पांच मार्च की रात को अपने गांव घोषी पहुंचा। लोगों को जानकारी हुई तो वह रविवार को उससे मिले और बातचीत की। भाजपा के मंडल अध्यक्ष विवेक सिंह व उनके साथी निशांत के घर पहुंचे और हालचाल जाना। निशांत सिंह ने बताया कि उनके साथ नाइजीरिया, जॉर्डन, पाकिस्तान के छात्र थे, सभी बस से रोमानिया सीमा तक पहुंचे। इस दौरान खाने के लिए सभी के पास बिस्किट, पाव ही थी। कहीं पर कुछ खाने का सामान दिख जाता तो बस रुक जाती, लेकिन दहशत इतनी थी कि बाहर निकलने में लोग डर रहे थे। छात्रों ने एक दूसरे की मदद की और किसी तरह से वह रोमानिया सीमा तक आ गए।
थोड़ी-थोड़ी दूर में होती थी चेकिंग
निशांत ने बताया कि युद्ध शुरू होते ही रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड सभी बंद हो गए। जल्द से जल्द यूक्रेन छोड़ने के निर्देश थे। सभी छात्र अपने साथ खाने का जो सामान लिए थे, उसी के सहारे मीलों चलें। बस मिली तो बैठकर बेलारूस सीमा तक आ गए। जहां हर एक-दो किमी पर रुस के सैनिक बसों को चेक करते थे। चेकिंग के दौरान उन्हें हाथों में लिए झंडे दिखाए जाते थे। जिससे पता चलता था कि हम सभी भारतीय छात्र हैं। यूक्रेन सीमा पार करते हुए भारत सरकार के अधिकारी मिले तो राहत की सांस ली आई।
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36 घंटे बंद था मोबाइल
निशांत ने बताया कि एक समय ऐसा आया कि अधिकांश लोगों के मोबाइल बंद हो गए। चार्जिंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण करीब 36 घंटे तक मोबाइल बंद रहा। ऐसे में घबराहट होने लगी। परिवार से संपर्क नहीं हो रहा था और कोई जरूरी संदेश भी नहीं मिल पा रहा था।
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