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हर साल औसतन सौ करोड़ का खर्च और साक्षरता में मामूली सुधार

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फतेहपुर। जनपद की शिक्षा व्यवस्था पर सालाना औसतन 80 से 100 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहा है। यह धनराशि शिक्षकों के वेतन, मिड डे मील और विद्यालयों के रखरखाव में खर्च हो रही है। इतने भारी भरकम खर्च के बावजूद जिले की साक्षरता दर में मामूली सुधार है।
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दो दशक के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले की साक्षरता में महज 22.74 फीसदी इजाफा हुआ है। यानी एक साल में लगभग एक प्रतिशत। जाहिर है जिस भारी भरकम मात्रा में पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। उस हिसाब से साक्षरता में इजाफा नहीं हो रहा है। वर्ष 1991 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक जनपद में पुरुषों की सारक्षता दर 59.88 प्रतिशत रही। जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 27.25 रही।
इस तरह उस वक्त जनपद की 44.69 फीसदी आबादी साक्षर थी। दोबारा जब वर्ष 2011 की जनगणना का सर्वेक्षण हुआ तो इसमें साक्षरता दर में बढ़त दर्ज की गई। पुरुषों की साक्षरता दर बढ़कर 77.19 हो गई तो वहीं महिलाओं की दर बढ़कर 56.58 फीसदी हो गई। इस तरह से एक दशक में जनपद की साक्षरता दर में मात्र 22.74 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया।
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