बिंदकी। तीन दशक से चली आ रही मुंसिफ कोर्ट की मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है। दशकों से अधिवक्ता मुंसिफ कोर्ट की मांग करते आ रहे हैं। गुरुवार को सीजेएम ने क्षेत्र के कई गांवों में जमीन देखी है।
तहसील क्षेत्र के हजारों मुकदमे जनपद मुख्यालय की सत्र न्यायालय में चल रहे हैं। मुकदमों की पैरवी के लिए वादकारियों को 25 किलोमीटर दूर फतेहपुर जाना और आना पड़ता है। इससे लोगों का समय और अतिरिक्त धन भी व्यय होता है। साथ ही आने जाने में लोगों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। तहसील के अधिवक्ता तीन दशक से जनप्रतिनिधियों के माध्यम मुंसिफ कोर्ट की मांग करते आ रहे हैं।
सीजेएम मंजू कुमारी और बिंदकी ग्रामीण न्यायालय के जुडिशियल जज अतुल पाल ने राजस्व टीम के साथ तहसील क्षेत्र के गांव हबीबपुर, महरहा, हाफिजपुर हरकरन, मुगल रोड में शहीद स्थल बावनी इमली के समीप कई स्थानों पर जमीनों का निरीक्षण किया। मुंसिफ कोर्ट बनाने के लिए लगभग 20 बीघे जमीन की आवश्यकता है। तहसील क्षेत्र में अन्य जगहों पर भी जमीन खोजने का काम किया जा रहा है।
यह है प्रक्रिया
तहसील क्षेत्र में मुंसिफ कोर्ट बनाने के लिए उपयुक्त जमीनों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में गठित समिति को सौंपी जाएगी। इसके बाद हाईकोर्ट की समिति इन जमीनों का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के बाद समिति के सदस्य किसी एक उपयुक्त जमीन का मुंसिफ कोर्ट के लिए चयन करेंगे। समिति की मंजूरी मिलने के बाद मुंसिफ कोर्ट बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।