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नौ महीने से असली पता तलाश रहे नई बस्ती के लोग

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किशनपुर। कस्बे के सटे नई बस्ती वार्ड के करीब 550 परिवार के लोगों को अब तक असली पते की जानकारी नहीं है। कहने को तो वह नगर पंचायत की सीमा में रहते हैं लेकिन तहसील प्रशासन यह मानने को तैयार नहीं है।
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किशनपुर नगर पंचायत सीमा के आसपास कई साल से लोग निवास बनाकर रह रहे हैं। कई वर्ष बीत जाने के बाद उनके नाम ग्राम सभा से कट गए और वर्ष 2017 के बाद अचानक उनके नाम नगर पंचायत में शामिल हो गए। इसी के साथ यह लोग नगर पंचायत के निवासी मान लिए गए।
इनका नाम भी मतदाता सूची में आ गया और विकास कार्य भी यहां होने लगे। शिकायत पर जांच हुई तो यहां के रहने वाले लोगों के आवेदन निरस्त होना शुरू हो गए। उन्हें बताया गया कि जहां वह रहते हैं, वह जमीन रामपुर राजस्व ग्राम की है।
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यह समस्या ऐसी है, जिसने यहां रहकर पढ़ने व परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के सामने समस्या खड़ी कर दी है। उनके आय, जाति, निवास आदि प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। आवेदन करते ही उन्हें निरस्त कर दिया जाता है। कारण में पता गलत होना बताया जाता है।
नई बस्ती, काली माता मंदिर मोहल्ले के रहने वाले लोग अगर किशनपुर के नहीं है तो वह रामपुर ग्राम सभा के निवासी हैं, लेकिन लिखा-पढ़ी में उनके पास ग्राम सभा का कोई भी साक्ष्य मौजूद नहीं है। नगर पंचायत ने अपने इस वार्ड में करोड़ों रुपये खर्च कर रखे हैं, जो उसकी सीमा में नहीं है। इसकी जांच एसडीएम की अगुवाई में चार सदस्यीय टीम कर रही है। नौ महीने बीत चुके हैं और यह जांच अभी भी जारी है।
12 नवंबर को गठित हुई थी जांच समिति
किशनपुर के रहने वाले रामराज सिंह, सुनील शुक्ला, उमाशंकर आदि ने पूर्व जिलाधिकारी संजीव सिंह के कार्यकाल में इसकी शिकायत करते हुए मुद्दा उठाया तो उन्होंने 12 नवंबर 2020 को एसडीएम खागा के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम का गठन कर जांच करने को कहा, जो अब तक चल रही है। अभी तक नई बस्ती के लोग अपना असली निवास स्थान नहीं खोज सके हैं।
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