फतेहपुर। स्वास्थ्य मंत्री और डिप्टी सीएम के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के पर्चे पर दवाओं के नाम स्पष्ट लिखने की व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल में कुछ डॉक्टर दवा का नाम हिंदी या अंग्रेजी में लिखने के बजाय उसका फार्मूला लिख रहे हैं।
इससे मरीजों को दवा खरीदने में परेशानी हो रही है। कई बार दवा काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों को भी फार्मूला समझने में दिक्कत होती है। ऐसे में मरीजों की मांग है कि डॉक्टर दवाओं के नाम स्पष्ट रूप से लिखें, ताकि उन्हें दवा पहचानने और खरीदने में परेशानी न हो।
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. आरके मौर्य ने बताया कि सभी डॉक्टरों को स्वास्थ्य मंत्री के आदेश से अवगत कराया जा चुका है। यदि कोई आदेश का पालन नहीं कर रहा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हिंदी में दवा के नाम लिखना हो अनिवार्य
शालिनी ने बताया कि दवा का पर्चा लेकर वह दवा काउंटर पर पहुंचीं। यहां काउंटर पर मौजूद कर्मी को फार्मूला समझने में दिक्कत हुई। ऐसे में ये भी जानना मुश्किल होता है कि कौन-सी दवा कब खानी है। डॉक्टर दवाओं के नाम हिंदी में लिखें, तो मरीजों को काफी सहूलियत होगी।
जनार्दन प्रताप ने बताया कि डॉक्टर दवाओं के नाम हिंदी में लिखने लगें, तो आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। इससे मरीज समझ सकेंगे कि कौन-सी दवा किस बीमारी या परेशानी के लिए दी गई है और उसे किस तरह लेना है। दवाओं की सही जानकारी से उपचार समझने में आसानी होगी। हालांकि, आराम मिलने पर भी डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद नहीं करनी चाहिए।
फोटो-27-शालिनी। संवाद
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