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रायल्टी में खेल करके बेच दी करोड़ों की मौरंग

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फतेहपुर। जिले में मौरंग माफियाओं का बड़ा कारनामा सामने आया है। खागा तहसील क्षेत्र में अवैध रूप से डंप करोड़ों की मौरंग रायल्टी में खेल करके बेच दी गई। मामले में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी मिलीभगत का आरोप लगा है। पुलिस ने दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू की है।
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लखनऊ के विकास नगर निवासी संजय मिश्रा ने डंप के लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। संजय ने बताया कि खनिज विभाग से उसे 25000 घन मीटर का लाइसेंस मिला गया। उसने पट्टाधारक से 25000 हजार मीटर मौरंग खागा तहसील के ओरहा में डंप करने के लिए कहा।
लेकिन डंप संचालक ने केवल 5000 घन मीटर ही मौरंग डंप की। बाद में पता चला कि उसके नाम से भंडारण के लिए जून 2021 में 14491 घन मीटर की रॉयल्टी जारी कराई गई है। जबकि भंडारण केवल 5000 घन मीटर ही था।
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संजय ने बताया कि इस मामले की शिकायत उसने खनिज अधिकारी से की। उन्होंने निदेशालय के आदेश पर रायल्टी जारी होने की बात कही। जब उसने जारी हुई रायल्टी की फीडिंग पोर्टल पर की तो 3000 घन मीटर की रायल्टी स्वीकार नहीं हुई। पता चला कि यह रायल्टी पहले ही फीड हो चुकी है। इससे साफ हुआ कि उसके नाम से जारी रायल्टी का दूसरी जगह इस्तेमाल हुआ है। मामले की विभागीय अधिकारियों से जांच कराने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई।
संजय के मुताबिक, अवैध डंप की गई मौरंग उनकी रॉयल्टी से मेसर्स चित्रकूट ग्रेनेट के महेश तिवारी निवासी चित्रकूट और पट्टा धारक मधुबाला के पति मनीष ओझा निवासी गोंडा ने बेची है। उनकी रायल्टी डुप्लीकेट भी तैयार की गई। फर्जी तरीके से रायल्टी तैयार करने में पूरा गैंग काम कर रहा है।
इस तरह से करोड़ों के राजस्व की भी चोरी की गई। जिले के कई मौरंग डंप में फर्जी रॉयल्टी का इस्तेमाल हुआ है। लाइसेंस बिना जांच के गलत दस्तावेजों के जरिए जारी हुए हैं। संजय का आरोप है कि शिकायत के दौरान उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई है।
खदान में ही गड्ढा खोदकर जिंदा दफन कर देने की धमकी दी गई। पूरे मामले में खनिज विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी मिले हुए हैं। मामले में डीएम और एसपी से शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस ने महेश तिवारी और मनीष ओझा के खिलाफ धोखाधड़ी, चोरी, खनिज एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
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