अमृतपुर। रविवार को गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से तीसराम की मड़ैया जाने वाले मार्ग पर पानी भर गया है। इससे लोगों को पानी से होकर गांव जाना पड़ रहा है। गांव वालों का कहना है कि इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो रास्ता बंद होने से वे गांव में कैद हो जाएंगे। जलस्तर बढ़ने से कटान भी तेज हो गया है।
गंगा में नरौरा बांध से लगातार पानी छोड़े जाने से जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। इससे कटान ने तेजी पकड़ ली है। गांव के खेतों में पानी भर गया है और कटान हो रहा है। इससे ग्रामीण परेशान है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव जाने वाले मार्ग पर पुलिया पड़ती है। इसका निर्माण कराने के लिए उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से बाढ़ से पहले मांग की थी।
डीएम ने भी पीडब्लूडी विभाग को पुलिया का निर्माण कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन पीडब्लूडी विभाग की अनदेखी के कारण पुलिया का निर्माण नहीं हो सका। इससे गांव के मार्ग में पानी भरना शुरू हो गया। रविवार को पानी भर जाने के कारण लोग से पानी से गुजर कर गांव गए। ग्रामीणों का कहना है कि तहसील प्रशासन ने बाढ़ शरणालय बनाया है, लेकिन वहां पर जानवरों के लिए कोई जगह नहीं है। बाढ़ आने पर वह जानवरों को छोड़कर शरणालय में कैसे जा सकते है।
प्रशासन उनके और पशुओं के ठहरने के लिए ऊंचाई पर खाली पड़ी जमीन उपलब्ध करा दे तो वे वहां पर पॉलीथीन तान कर परिवार के साथ निवास कर लेंगे और पशुओं को भी वहीं बांध लेंगे।
ठोकरें बनवाना भूल गए अधिकारी
अमृतपुर। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने एक सप्ताह पूर्व तीसराम की मड़ैया गांव का निरीक्षण कर कटान की स्थिति देखी थी। कटान रोकने के लिए डीएम ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को ठोकरें बनवाने के निर्देश दिए थे ताकि कटान से गांव को बचाया जा सके। डीएम के जाने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी दोबारा गांव नहीं आए और ठोकरें भी नहीं बनवाईं। इसी तरह कटान होता रहा तो कई लोगों के मकान गंगा में समा जाएंगे।
गंगा के जलस्तर में 10 सेंटीमीटर बढ़ोतरी
फर्रुखाबाद। गंगा में लगातार छोड़े जा रहे पानी की मात्रा अधिक होने से जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। रविवार को गंगा में नरौरा से 77679 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जलस्तर 136.15 से बढ़कर 136.25 मीटर पर पहुंच गया है, जो चेतावनी बिंदु से 35 सेंटीमीटर दूर रह गया है। रामगंगा में 425 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। रामगंगा का जलस्तर अभी काफी नीचे है।