कमालगंज। रामपुर माझगांव ग्राम पंचायत में पिछले प्रधान के कार्यकाल में हुए मनरेगा कार्यों का सोशल ऑडिट करने पहुंची टीम को पंचायत साचिव ने अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए। इससे टीम को चक रोड व अन्य कार्यों की नापजोख किए बिना बैरंग वापस आना पड़ा।
ब्लाक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल रामपुर माझगांव में 2020-21 में पूर्व प्रधान सूरजपाल के कार्यकाल में हुए मनरेगा कामों का सोशल ऑडिट करने के लिए गुरुवार को पांच सदस्यीय ऑडिट टीम गांव पहुंची। खुली बैठक के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि जो भी कार्य हुए हैं। उसकी नाप कराई जाए। जिन मनरेगा श्रमिकों को भुगतान दिखाया गया है। उसका सत्यापन किया जाए।
ऑडिट टीम प्रभारी राजीव मिश्रा ने कहा कि उन्हें एमबी, मस्टर रोल व अन्य अभिलेख ही नहीं मिले हैं। रोजगार सेवक गजराज ने कहा कि उन्होंने तत्कालीन साचिव राजीव श्रीवास्तव को फोन कर आडिट की जानकारी दी थी पर उन्होंने रिकार्ड नहीं दिया। गांव वालों ने कहा कि बिना नापजोख के आडिट की खानापूर्ति नहीं होने देंगे। इस पर टीम प्रभारी ने कहा कि वह शुक्रवार को फिर आएंगे।
556 गड्ढों की एमबी, मौके पर नहीं मिले पैधे
रजीपुर पंचायत घर में रिंकी गंगवार के नेतृत्व वाली टीम ने रजीपुर में आडिट किया। पिछले वर्ष पौधरोपण के लिए 556 गड्ढों की एमबी हुई थी, लेकिन मौके पर टीम को पौधे नहीं मिले। सचिव आकांक्षा मौजूद नहीं थीं। टीए बृजराज व ऑडिटर सुभाष मौजूद रहे। रानूखेड़ा में 22 कार्यों का सत्यापन हुआ।