फर्रुखाबाद। लोहिया पुरुष अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती एक मरीज की इंजेक्शन लगाने के बाद हालत बिगड़ गई। आरोप है कि सूचना देने पर इमरजेंसी डाक्टर ने अभद्र भाषा का प्रयोग कर दिया। इस पर परिजनों ने हंगामा कर दिया। महिला के एक भाजपा से जुड़े रिश्तेदार ने अधिकारियों को दी तब दो डाक्टर पहुंच गए और मरीज का रेफर लेटर बना दिया।
शहर के मोहल्ला कादरीगेट निवासी रामतीर्थ अवस्थी (47) को दो-तीन दिन से बुखार आ रहा था। हालत बिगड़ने पर बुधवार सुबह सवा तीन बजे इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। भाई सर्वेश अवस्थी ने बताया कि मरीज का ठीक से इलाज नहीं किया जा रहा था। ड्यूटी पर तैनात डाक्टर ने कहने के बाद भी सुनवाई नहीं की। सुबह करीब नौ बजे मरीज को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद हालत बिगड़ गई तो परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया। महिलाएं रोने लगीं।
कुछ देर में रिश्तेदार भाजपा जिला संयोजक प्रमोद बाजपेई पहुंचे और सीएमएस समेत
अन्य अधिकारियों को सूचना दी। इसके कुछ ही देर बाद आंख रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज पांडेय पहुंचे और इलाज शुरू किया। करीब सवा 11 बजे हालत में कुछ सुधार हो गया। डॉ. मनोज ने मरीज का रेफर लेटर बना दिया।
दो घंटे नहीं खुला ऑक्सीजन का बोल्ट
मरीज की जब हालत बिगड़ी, तो ऑक्सीजन का छोटा सिलिंडर लाया गया। काफी प्रयास के बावजूद कर्मचारी उसका बोल्ट नहीं खोल सके। इस पर ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स इमरजेंसी कक्ष में पहुंचीं। वहां भी कोई सिलिंडर नहीं था। करीब दो घंटे बाद सिलिंडर की व्यवस्था हो सकी।
इमरजेंसी से ऑक्सीजन मास्क व पाइप गायब
अस्पताल की इमरजेंसी जहां किसी भी वक्त मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है। ऑक्सीजन के चार प्वाइंटों में से एक फ्लोेमीटर से पाइप और मास्क गायब है, तो दूसरे बच्चा वाले प्वाइंट में सिर्फ मास्क ही लटर रहा है। उससे भी पाइप गायब कर दिया गया है। सुबह 11 बजे ड्यूटी चीफ फार्मासिस्ट जितेंद्र कुमार ने इसकी जानकारी डॉक्टरों को दी। इमरजेंसी से महत्वपूर्ण सामान की चोरी होने से मरीजों की जान पर आफत बनना माना जा रहा है।
डॉक्टर न मिलने पर सीएमएस का घेराव, नारेबाजी
फर्रुखाबाद। लोहिया पुरुष अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर के न मिलने पर करीब 40 मरीज सीएमएस के कक्ष में पहुंच गए। कर्मचारी ने अंदर जाने से रोका तो विवाद हो गया। बाद में दो मरीज अंदर गए, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस पर मरीज नारे लगाने लगे। हालांकि कुछ स्वास्थ्य कर्मियों के समझाने पर वह मायूस लौट गए।
ओपीडी में आर्थो सर्जन को दिखाने गए मरीजों को कोई डॉक्टर नहीं मिला। डॉ. योगेंद्र मिश्रा अवकाश पर और डॉ. वीके दुबे के कमरे में ऑपरेशन कक्ष का बोर्ड लगा था। करीब 50 मरीज दो-दो घंटे के इंतजार में खड़े थे। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे सब्र का बांध टूट गया, तो भउया नगला की अनुष्का, अमृतपुर के शहवाज, अमृतपुर मलोहिया के अरुण कुमार, भाऊटोला की सुदामा, नोनमगंज फतेहगढ़ के राजीव, पुलमंडी के प्रेम, रिषीपाल आदि करीब 40 मरीज सीएमएस कक्ष में पहुंच गए।
उन्होंने अंदर घुसने का प्रयास किया, तो कर्मचारी ने रोक लिया। इस पर तूतू-मैमै हो गई। चार मरीजों ने अंदर सीएमएस से शिकायत की, तो उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इससे गुस्साए मरीजों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। हालांकि कुछ स्वास्थ्य कर्मियों ने मजबूरी बताकर लोगों को शांत कर दिया। कुछ मरीज वापस चले गए और कुछ इंतजार करने लगे।
बेटी को गोद में लेकर इमरजेंसी में रोती रही मां
फर्रुखाबाद। मऊदरवाजा थाने के गांव महेलिया की नीलम की बेटी गौरी (8) के गले में कई दिनों से परेशानी है। उसे सांस लेने में जब दिक्कत होने लगी, तो बुधवार सुबह नौ बजे इमरजेंसी पहुंची। वहां से सात नंबर कमरे में जाने की बात कह दी। वहां से फिर इमरजेंसी भेज दिया गया। वह बेटी को गोद में लेकर इमरजेंसी में ही रोती रही, मगर किसी का भी दिल नहीं पसीजा।
डॉक्टरों की कमी की वजह से बड़ी दिक्कत हो रही है। मरीजों को सही इलाज न मिलने से वह खुद परेशान हैं। ऑपरेशन करने के बाद डॉ.वीके दुबे ने मरीजों को देखा था। अफसरों को डॉक्टर उपलब्ध करवाने के लिए पत्राचार किया जा चुका है। आश्वासन मिला है। फिर भी वह जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। दो डॉक्टरों को अचानक अवकाश पर जाना पड़ा है।
-डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में आक्सीजन प्वाइंट से गायब पाइप व मास्क। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
लोहिया अस्पताल में सीएमएस कक्ष के बाहर प्रदर्शन करते मरीज। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD
लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी कक्ष में मरीज की हालत बिगड़ने पर रोती महिला। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD