फर्रुखाबाद। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेलवे अश्वनी कुमार ने रेलवे संपत्ति अधिनियम के मुकदमे में सेवानिवृत्त वन रेंजर और डिप्टी रेंजर को दोषी करार दिया है। दोनों को छह महीने तक आचरण ठीक रखने (परिवीक्षा दंड) और शांति बनाए रखने का आदेश दिया गया है।
जिला आगरा व कोतवाली के बल्केश्वर कॉलोनी निवासी वन विभाग से सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर हृदेश कुमार, जिला शामली के थाना जलालाबाद के अहमदपुर निवासी सेवानिवृत्त वन क्षेत्राधिकारी सत्यपाल, फिरोजाबाद जिला के थाना एका के नगला रमिया निवासी वन रक्षक विद्याराम और एटा जिला के थाना सहावर के मोहल्ला मोरी निवासी आरा मशीन मालिक विनोद कुमार गुप्ता के खिलाफ आरपीएफ कासगंज की ओर से कोर्ट में वर्ष 2000 में परिवाद दर्ज कराया था।
इसमें आरोप है कि एक अक्तूबर 2000 को सुबह दस बजे बोंदर रोड सहावर स्थित विनोद कुमार गुप्ता की आरा मशीन पर रेलवे क्षेत्र से काटी गई शीशम की लकड़ी बरामद हुई थी। इस लकड़ी को कटवाने में वन क्षेत्राधिकारी कासगंज सत्यपाल, डिप्टी रेंजन हृदेश कुमार व वन रक्षक विद्याराम ने सहायता की। आरपीएफ कासगंज के विवेचक ने रेलवे कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। आरोपी विनोद कुमार गुप्ता व विद्याराम की मुकदमे की सुनवाई की अवधि में मौत हो चुकी है। दो आरोपियों पर मुकदमा चलाया गया।
साक्ष्यों के आधार पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेलवे ने रेलवे संपत्ति अधिनियम में दोनों को दोषी करार दिया। दोषियों को छह माह तक आचरण ठीक रखने का आदेश दिया गया है। सत्यपाल को जिला प्रोबेशन अधिकारी गाजियाबाद व हृदेश कुमार को एटा के जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में 20 हजार रुपये का जमानतदार व इसी धनराशि का व्यक्तिगत बंधपत्र देना होगा। आचरण ठीक न रखने पर दोषियों को तलब तक दोबारा सुनवाई कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।