फर्रुखाबाद। नेशनल चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण, एक रजत व स्टेट चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य समेत 50 मीटर राइफल शूटिंग में 30 पदक जीत चुका निशानेबाज सुविधाओं के अभाव में गांव के पास छोटी सी दुकान लगाकर कपडे़ बेच रहा है। वर्ष 2017 में स्कालरशिप के लिए जिला क्रीड़ा अधिकारी के पास आवेदन किया था लेकिन निराशा ही हाथ लगी। अब किराये की राइफल से निशाना लगाने की स्थिति में नहीं है। हां मदद और मौका मिले तो देश के लिए फिर खेलेंगे।
भाऊपुर चौरासी गांव किसान भगवान स्वरूप के बेटे विकीराज कश्यप (25) को बचपन ही निशानेबाजी का शौक था। शाहजहांपुर जिले के मिर्जापुर से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। इसी बीच शहर के क्रिश्चियन इंटर कालेज से एनसीसी में प्रवेश भी लिया। एनसीसी यूपी-12 बटालियन के अधिकारियों ने विकी की प्रतिभा को पहचाना। अधिकारियों की मदद से विकी की प्रतिभा को पंख लग गए।
विकी ने वर्ष 2012 में दिल्ली में हुई यूपी स्टेट चैंपियनशिप की 50 मीटर राइफल शूटिंग स्पर्धा में एक स्वर्ण, दो कांस्य और नार्थ जोन दिल्ली चैंपियनशिप में दो स्वर्ण व एक रजत पदक जीता।
वर्ष 2013 की यूपी स्टेट चैंपियनशिप की 50 मीटर राइफल शूटिंग में फिर एक रजत व एक कांस्य पदक अपने नाम किया। वर्ष 2013 में ही पश्चिम बंगाल के आसन सोल में हुई आल इंडिया जीवी मावलंकर शूटिंग प्रतियोगिता में कांस्य जीता। फिर नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप (2013) में दो स्वर्ण पदक हासिल किए। नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में फिर विकी का डंका बजा। उन्होंने इस प्रतियोगिता में भी एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। ये पदक विकी ने रायफल किराये पर लेकर जीते। उनके पास रायफल खरीदने के लिए पैसे ही नहीं थे।
नेशनल चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण, एक रजत जीतने के बाद भी विकी को न ही सरकार से कोई मदद मिली और न ही किसी निजी संस्था ने ही सहयोग किया। इसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा और 2015 में नई दिल्ली में हुई नेशनल चैंपियनशिप में 11वीं-12वीं रैंक, वर्ष 2017 में केरल के त्रिवेंद्रम में हुई नेशनल चैंपियनशिप में 229 रैंक पर फिसल गए। अंतत: उभरते निशानेबाज ने खेल से दूरी बनाकर परिवार चलाने के लिए कपड़े की दुकान खोल ली है।
पहले राइफल क्लब में करते थे अभ्यास
विकीराज ने बताया कि वह जिला राइफल क्लब से जुड़ गए थे। इसके चलते फतेहगढ़ में सेना की टीए बटालियन रेंज में अभ्यास का मौका मिला जाता था। वह समय के एनसीसी के अधिकारी परिचित थे, वह शिविरों में बतौर कोच मौका दे देते थे। इसमें कुछ धनराशि भी मिल जाती थी। अब कहीं मौका नहीं मिलता है।
माता-पिता ने प्रतियोगिता में भेजा था
विकी ने बताया कि वर्ष 2012 में घर में आग लग गई थी। उसी समय दिल्ली में नार्थ जोन चैंपियनशिप में प्रतिभाग करना था। जाने का मन नहीं था, लेकिन माता-पिता ने हिम्मत बंधाई और वहां भेजा।
सात लाख में आती है राइफल
विकी ने कहा कि निशानेबाजी महंगा खेल है। राइफल सात लाख रुपये और किट की शुरुआती कीमत 40 हजार रुपये है। प्रतियोगिता के दौरान किराये पर एक दिन के लिए 10 हजार रुपये में राइफल लेते थे। अभ्यास के लिए जनपद में कोई रेंज भी नहीं है।
दुकान पर बैठा निशानेबाज खिलाड़ी विकी राज कश्यप। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD