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मनरेगा: नियमों को ठेंगा दिखा करा दिए 6.50 करोड़ के काम

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मनरेगा से बन रहा चकरोड। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। राजेपुर विकास खंड क्षेत्र में मनरेगा के तहत हुए कामों में नियमों को ही दरकिनार कर दिया गया। 6.50 करोड़ से कराए गए कामों में मानक से ज्यादा धनराशि सामग्री पर खर्च कर दी गई। इस खेल की जानकारी जब डीसी मनरेगा को हुई तो विभाग में खलबली मच गई। उन्होंने भुगतान पर रोक लगा दी है और टीमों को लगाकर सत्यापन शुरू कराया है।
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ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा से विकास कार्य कराए जाते हैं। इसमें चकरोड, तालाब खोदाई के साथ ही खड़ंजा, पंचायत घर आदि पक्के निर्माण कार्य भी शामिल हैं। नियमानुसार, मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों में कुल लागत की 60 प्रतिशत धनराशि मजदूरी पर खर्च की जाती है, जबकि अधिकतम 40 प्रतिशत धनराशि से निर्माण सामग्री खरीदी जा सकती है।
राजेपुर ब्लाक क्षेत्र में जो भी काम हुए उसमें इन मानकों को दरकिनार कर दिया गया। करीब 6.50 करोड़ रुपये के ऐसे काम सामने आए हैं जिनमें सामग्री की खरीद पर 40 फीसदी से ज्यादा की धनराशि खर्च की गई है। यह भी पता चला है कि इस्टीमेट स्वीकृत करने के नाम पर भी जमकर खेल हुआ।
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वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में जब फाइलें जिला मुख्यालय पहुंचीं तो मामला पकड़ में आ गया। इसके बाद इन कार्यों के भुगतान पर डीसी मनरेगा ने रोक लगा दी। साथ ही इन कार्यों के सत्यापन कराने का काम शुरू कर दिया है। इससे राजेपुर विकास खंड के अधिकारी व कर्मचारियों में हड़कंप मचा है।
इस तरह पास होती हैं कार्यों की फाइलें
मनरेगा से जुड़े कामों को स्वीकृत कराने के लिए फाइल रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक व सचिव के हस्ताक्षर के बाद ब्लाक में पहुंचती है। वहां कंप्यूटर ऑपरेटर, सहायक लेखाकार व लेखाकार जांच करते हैं और फिर फाइल अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) के पास पहुंचती है जहां काम स्वीकृति मिलती है। अधिकांश एपीओ ही बीडीओ या कार्यक्रम अधिकारी की लॉगिंन पर काम करते हैं। हालांकि इस्टीमेट पास करने की जिम्मेदारी कार्यक्रम अधिकारी की होती है, इससे खेल में सभी के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
नहीं होगा भुगतान, पहले होगा सत्यापन
डीसी मनरेगा राजमणि वर्मा ने बताया कि ब्लाक राजेपुर में नियम विरुद्ध तरीके से करीब 6.50 करोड़ के इस्टीमेट पास किए गए हैं। इनका भुगतान रोक दिया गया है। करीब 50-60 गांवों में स्वीकृत इन कार्यों के परीक्षण के लिए टीमें बनाई गई हैं। फिलहाल कुछ गांवों में सत्यापन शुरू हो गया है। सभी गांवों में सत्यापन के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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