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हमसे अच्छे तो दिहाड़ी मजदूर, आठ घंटे में कमाते हैं 400

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शहर के मोहल्ला हातापीर अली में अरशद के कारखाने में जरदोजी का काम करते कारीगर। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। जरदोजी कारखाना मालिकों द्वारा कारीगरों के लिए 10 रुपये मजदूरी (नफरी) बढ़ाने की घोषणा पर कारीगर काफी आहत हैं। उनका कहना है कि यह उनके साथ मजाक है। महंगाई आसमान पर है। हम कारीगर 11 घंटे काम करेंगे, तो 300 रुपये मिलेंगे, जबकि दिहाड़ी मजदूर आठ घंटे में ही 400 रुपये कमा लेंगे। अच्छे कारीगर को 400 रुपये से कम नफरी नहीं मिलनी चाहिए। कारीगर शीघ्र ही बैठक करके कुछ नया फैसला करेंगे।
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खटकपुरा निवासी जरदोजी कारीगर शीलू खान ने बताया कि सामान्य कारीगर की नफरी कम से कम 200 रुपये और अच्छे कारीगर की 250 रुपये तक होनी चाहिए।
छावनी के राशिद कहते हैं कि 10 रुपये से क्या भला होगा। कम से कम 30 रुपये नफरी नहीं बढ़ी, तो हम मजबूरन जरदोजी का काम छोड़कर दूसरा काम करेंगे। छह-सात घंटे में किसी अन्य काम में रोज 500 रुपये कमा लेंगे।
शमशेर खानी के बकार अहमद ने कहा कि हम लोगों से तो अच्छे चौक पर काम करने वाले मजदूर हैं। वह लोग 8 घंटे काम करके 400 रुपये कमा लेते हैं। हमें 11 घंटे में 300 रुपये मिलते हैं।
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हाता पीर अली के कारीगर शब्बू मंसूरी भी आहत हैं। कहा कि महंगाई चरम पर है। चार साल के बाद 10 रुपये नफरी बढ़ाई गई है। शीघ्र ही कारीगर बैठक करके बड़ा फैसला करेंगे।

शीलू खान। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

राशिव। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

बकार अहमद। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

शब्बू मंसूरी। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

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