फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया संयुक्त अस्पताल की दोनों लैबों में लगी बायो केमिस्ट्री मशीनें खराब हो गईं हैं। इससे किडनी, लीवर, शुगर आदि की जांचें बंद हैं। रोजाना करीब 80 मरीजों को निजी लैबों में जांच करानी पड़ रही है। इससे मोटी रकम खर्च करना उनकी मजबूरी है।
लोहिया अस्पताल के महिला और पुरुष अस्पताल में दो लैब हैं। इन लैब में 24 तरह की जांचें की जाती हैं। मगर 44 नंबर कक्ष की लैब में लगी बायो केमिस्ट्री मशीन चार दिन से खराब है और 75 नंबर कक्ष की मशीन दो दिन से बंद पड़ी है।
इससे लीवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी), सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी), शुगर आदि की जांचें बंद हो गई हैं। जबकि इन दिनों किडनी, लीवर, शुगर और लीवर संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
अस्पताल की दोनों लैबों में रोजाना 80 मरीज तक इन जांचों के लिए आ रहे हैं। मशीन खराब होने से इन्हें मजबूरी में वापस होना पड़ रहा है। ऐसे में गंभीर बीमार लोगों को निजी लैबों में जांच करानी पड़ रही है। जांचें बंद होने के बावजूद अभी तक अस्पताल के जिम्मेदारों ने मशीन सही कराने की जरूरत नहीं समझी है।
जांच कराने के लिए खड़ी दीक्षा, नीलम, मनू, मंगलम, अभय कुमार ने बताया कि वह दो दिन से आ रहे हैं, लेकिन जांच नहीं हो पा रही है। जब तक जांच रिपोर्ट नहीं मिलेगी, तब तक सही इलाज शुरू नहीं होगा। मजबूरी में निजी लैब से जांच करानी होगी।
एक हजार रुपये में होती है जांच
निजी लैब में किडनी और लीवर की जांच एक हजार रुपये में होती है। जबकि शुगर की 50 रुपये और सीआरपी की जांच के 200 रुपये में होती है।
सेटिंग वाली लैब में जाने की दे रहे सलाह
लोहिया अस्पताल की लैब में तैनात स्टाफ आने वाले मरीजों को अपनी सेटिंग वाली लैबों में जांच कराने की सलाह दे रहा है। मरीजों को लैबों पर फोन करके भेजा जा रहा है। अस्पताल प्रशासन इस ओर भी लापरवाह है।