कायमगंज (फर्रुखाबाद )। गांवों में चलने वाले कोल्हू पर गुड़ का कुटीर उद्योग करोड़ों की लागत से बनी चीनी मिलों से ज्यादा फायदेमंद है। चीनी मिलें घाटे में ही चलती रहती हैं लेकिन कोल्हू संचालक गुड़ बनाकर कम लागत में कई लाख का मुनाफा कमा लेते हैं। बाजार में चीनी की औसत में गुड़ का दाम भी अच्छा मिलता है। क्षेत्र में लगे लगभग 30 कोल्हू पर कायमगंज चीनी मिल से ज्यादा गन्ने की परोई भी होती है।
कायमगंज क्षेत्र में इस बार 5118 हेक्टेयर में गन्ने की फसल की बुवाई की गई थी। इसमें 33,26,700 क्विंटल उपज का अनुमान है। चीनी मिल में इस बार 16 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई का लक्ष्य है। कम से कम 1,726,700 गन्ने की पेराई गांवों में लगने वाले कोल्हू पर की जाएगी।
कोल्हू पर गुड़ के अलावा किसान खाने के लिए राब और सिरका भी तैयार करते हैं। मिल में गन्ना न ले जाने का एक कारण भुगतान देरी से होना भी है। मिल में पर्चे के हिसाब से नंबर भी देरी से आता है, इससे ज्यादातर किसानों के अगली फसल के लिए खेत भी खाली नहीं हो पाते हैं। इससे भी किसान कम दाम पर ही कोल्हू पर गन्ना बेचना पसंद करते हैं। चीनी मिल में गन्ने का भाव 350 रुपये प्रति क्विंटल है और कोल्हू पर किसान 290 से 300 रुपये क्विंटल में गन्ना बेच रहे हैं। छह दिसंबर तक चीनी मिले में 1.56 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई हुई है और कोल्हुओं पर लगभग एक लाख क्विंटल गन्ना पूरा जा चुका है। (संवाद)
चीनी से ज्यादा पैसा देता है गुड़
चीनी की अपेक्षा गुड़ में फायदा दिख रहा है। चीनी मिल में एक क्विंटल गन्ने से साढ़े आठ किलो चीनी तैयार होती है। एक क्विंटल गन्ना 350 रुपये का पड़ रहा है। मिल के खर्चे भी होते हैं। एक क्विंटल गन्ने से तैयार लगभग चीनी 340 रुपये पड़ रही है। कोल्हू पर एक क्विंटल गन्ने में 12 किलो गुड़ बनता है। गुड़ तैयार होता है। गुड़ का फुटकर भाव 40 रुपये किलो चल रहा है। एक क्विंटल गन्ने से 480 रुपये का पड़ रहा है। इस औसत से चीनी मिल की अपेक्षा कोल्हू चलाने वाले या गुड़ बनाने वाले फायदे में दिख रहे हैं। पास के जिलों मैनपुरी और एटा में गुड़ की बड़ी मंडियां हैं। इससे कोल्हू वालों का गुड़ आसानी से बिक भी जाता है।
कोल्हू पर एक दिन में 90 क्विंटल पेराई
गांव ममापुर निवासी कोल्हू संचालक पिंटू गंगवार ने बताया कि गांव चार कोल्हू चल रहे हैं। पहले चीनी बनाने के क्रशर चलते थे। चीनी के भाव कम होने से धीरे-धीरे क्रशर बंद हो गए। कोल्हू पर एक दिन में 90 क्विंटल गन्ने की पेराई हो जाती है। सभी खर्चे निकालकर गुड़ का कारोबार बेहतर है।