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हैंडपंप मरम्मत पर 45 लाख खर्च करने में सत्यापन शुरू

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फर्रुखाबाद। मोहम्मदाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत पिपरगांव में हैंडपंप की मरम्मत पर खर्च हुए 45 लाख के मामले में जांच शुरू हो गई है। टीम ने कराए गए कामों का सत्यापन शुरू कर दिया है। इसमें सर्वाधिक भुगतान प्रशासक के कार्यकाल में किया गया है।
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ग्राम पंचायतों में 25 दिसंबर 2021 को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के साथ सभी ब्लाकों में प्रशासन नियुक्त कर दिए गए थे। प्रशासकों ने करीब पांच माह के अपने कार्यकाल में मनमाने तरीके से भुगतान किए। मोहम्मदाबाद की ग्राम पंचायत पिपरगांव में तो प्रशासक ने 47 लाख का भुगतान किया। खास बात तो यह है कि गांव में पानी की टंकी होने के बावजूद तीन वर्ष में हैंडपंप मरम्मत व रिबोर पर 45 लाख रुपये खर्च दिखाया गया है।
ग्राम पंचायत में करीब 200 हैंडपंप हैं। इन पर वर्ष 2019-20 में आठ लाख व 2021-22 में पांच लाख खर्च हुए। जबकि वर्ष 2020-21 में हैंडपंप मरम्मत और रिबोर पर 32 लाख रुपये खर्च हो गए। इसमें सर्वाधिक भुगतान प्रशासक के कार्यकाल के दौरान सचिव ने किया।
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ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में गोलमाल की शिकायत पीएमओ तक पहुंची, लेकिन अधिकारियों ने जांच के नाम पर लीपापोती कर शिकायत का निस्तारण कर दिया। 15 जनवरी के अंक में अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की। इससे अधिकारियों ने संज्ञान में लिया। तब तक विधानसभा चुनाव की गतिविधियां तेज हो जाने से मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब फिर से ग्राम पंचायत से हुए भुगतान खंगालने का काम शुरू कर दिया गया है।
डीपीआरओ विनय कुमार सिंह ने बताया कि हैंडपंप मरम्मत पर इतनी बड़ी धनराशि खर्च होना अनियमितता का संकेत है। उन्होंने एडीपीआरओ को सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। सत्यापन कार्य चल रहा है। भुगतान में हेराफेरी मिलने पर जिलाधिकारी से अनुमोदन लेकर जिला पंचायतराज अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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