फर्रुखाबाद में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणाम विधानसभा चुनाव पर सीधा असर डालने वाले हैं। सत्ता में रहकर जिला पंचायत की 30 में से चार सीटें ही निकलना भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। सभी जनप्रतिनिधि भाजपा के होने के बावजूद कुछ तो अपनी साख तक नहीं बचा सके।
वहीं सत्ता से बाहर सपा ने सर्वाधिक नौ और बसपा ने जिला पंचायत सदस्य की तीन सीटों पर कब्जा जमाया है। पंचायत चुनाव को राजनीतिक पार्टियों ने विधानसभा चुनाव से जोड़कर तैयारी की थी। इससे जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर कब्जा जमाने के लिए बड़े दलों ने पूरी ताकत झोंकी थी।
इसका असर आने वाले 2022 के विधानसभा चुनाव पर पड़ने वाला है। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में भाजपा पूरी तनमयता से लगी रही। टिकट आवंटन के बाद पार्टी में हुई बगावत भाजपा पर भारी पड़ गई। भाजपा से चुनाव लड़ने में जहां दिग्गजों को मौका नहीं मिला, वहीं चार दिन से भाजपाइयों से सांठगांठ करने वाले टिकट के हकदार बने।
नतीजा यह रहा सबसे मजबूत संगठन वाली पार्टी के प्रत्याशियों से कार्यकर्ताओं ने ही मुंह मोड़ लिया और 30 में से 26 प्रत्याशी चुनाव हार गए। टिकट वितरण में धांधली के भी आरोप लग रहे हैं। इस करारी हार को भाजपा कार्यकर्ता ही जिम्मेदारों के कर्मों का फल बता रहे हैं।