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बिजली संकट: ग्रामीणों का सबस्टेशन पर हंगामा

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कंपिल स्थित विद्युत उपकेंद्र में प्रदर्शन करते किसान। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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कंपिल। एक माह से बिजली संकट से जूझ रहे ग्रामीण मंगलवार को भड़क गए। 150 से अधिक लोगों ने कंपिल विद्युत उपकेंद्र पर हंगामा किया। जेई को घेरकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों को दिन भर में करीब तीन घंटे ही बिजली मिल रही है। दो फेस आने से ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं, इससे फसलों को पानी नहीं मिल रहा है। जेई ने आठ घंटे आपूर्ति का भरोसा देकर मामला शांत कराया।
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गर्मी बढ़ने के साथ ही कंपिल विद्युत उपकेंद्र में लगा पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर ओवरलोड होने लगा है। इससे एक माह से जबरदस्त कटौती हो रही है। रुदायन क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों को एक दिन छोड़कर तीनों फेस से बिजली दी जा रही थी, लेकिन गर्मी में बढ़ोत्तरी होने के कारण कुछ दिनों से ट्रांसफार्मर ज्यादा ओवरलोड होने लगा। इससे बिजली का समय घटता चला गया। रात में भी बिजली मिलना बंद हो गई।
ओवरलोडिंग से कंपिल टाउन में भी समस्या बढ़ गई। सुबह होते ही कहीं ट्रांसफार्मर का फ्यूज उड़ रहा है तो कहीं केबल में फाल्ट हो जाता है। इससे दिन भर आपूर्ति बाधित रहती है। रात नौ बजे के बाद ही कस्बे के लोगों को सात से आठ घंटे आपूर्ति मिल पाती है।
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मंगलवार को रुदायन फीडर से जुड़े गांव बिल्सडी, बिल्हा, पहाड़पुर, जौरा, सुल्तनापुर, कादरदादपुर सराय, कमलाईपुर सहित 20 से अधिक गांवों के लोग कंपिल विद्युत उपकेंद्र पहुंच गए और हंगामा कर दिया। ग्रामीणों ने लागबुक देखी तो बिजली आपूर्ति का खेल खुल गया। रिकार्ड में 18 घंटे की आपूर्ति दिखाई जा रही थी। इस पर किसानों ने एसएसओ राजकुमार से नाराजगी जताई और कहा कि बिजली तीन घंटे ही मिल रही है।
किसानों ने लॉगबुक की मोबाइल से फोटो खींच ली। हंगामे की सूचना पर कंपिल थाने का फोर्स मौके पर पहुंचा। पुलिस ने भीड़ को समझाकर शांत किया। जानकारी मिलने पर जेई प्रमोद कुमार पहुंचे। इस पर किसानों ने जेई को घेर लिया। किसानों का कहना था कि उन लोगों को तीन घंटे बिजली मिल पा रही है। उसमें भी दो फेस ही आते हैं। इससे ट्यूबवेल नहीं चल रहे हैं और सिंचाई प्रभावित हो रही है।
फसलें सूख रही हैं। जेई ने कहा कि ट्रांसफार्मर की क्षमता 262 एंपीयर है, जबकि 10 हजार से अधिक उपभोक्ता हैं। इससे ओवरलोड की समस्या आ रही है। जेई से लोगों की नोकझोंक भी हुई। किसानों ने कहा कि उन्हें बिजली चाहिए, जिससे उनके नलकूप चल सकें। जेई ने किसानों को आठ घंटे बिजली देने का भरोसा दिया, तब लोग शांत हुए।
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