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आरोपी बालकृष्ण उर्फ शिशु को कोर्ट ने किया बरी

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फर्रुखाबाद। 17 वर्ष पहले हुए लक्ष्मी नरायन दुबे हत्याकांड में आरोपी को कोर्ट ने बरी कर दिया है। आरोपी पति पत्नी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। मिथ्या साक्ष्य देने पर कोर्ट ने दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेेश दिए हैं।
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मोहम्मदाबाद कोतवाली के गांव सहसापुर में लक्ष्मी नरायन दुबे का अपने भाई कौशल किशोर दुबे से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। 16 फरवरी 2004 को लक्ष्मी नरायन दुबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी पत्नी प्रभा दुबे ने जनपद इटावा थाना इकदिल के गांव मानिकपुर विसु निवासी बाल कृष्ण उर्फ शिशु, गांव सहसापुर निवासी कौशल किशोर दुबे, उनकी पत्नी कृष्ण मुरारी दुबे सहित नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। छह आरोपियों को बाल अपचारी घोषित कर फाइल किशोर न्याय बोर्ड में भेज दी गई थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कौशल किशोर दुबे व उनकी पत्नी कृष्ण मुरारी दुबे की मौत हो गई थी।
शुक्रवार को मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष हुई। अभियोजन पक्ष अपने आरोप साबित करने में असफल रहा। इस पर न्यायाधीश ने आरोपी बालकृष्ण उर्फ शिशु को दोषमुक्त कर दिया। हत्या के मुकदमे में मिथ्या साक्ष्य देने पर अनुराग दुबे उर्फ डब्बन व प्रभा दुबे के खिलाफ दंड प्रकिया संहिता 344 के तहत मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए।
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आरोपी बालकृष्ण उर्फ शिशु की ओर से बार के पूर्व पदाधिकारी वकील बृजेंद्र मोहन अग्निहोत्री उर्फ टिल्लू ने दलीलें दीं। लक्ष्मी नरायन व कौशल किशोर दुबे बसपा नेता अनुपम दुबे के चाचा थे।
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