मोहम्मदाबाद (फर्रुखाबाद)। बसपा नेता अनुपम दुबे और उनके परिवार के लोगों पर दर्ज मुकदमों की जांच के लिए ज्ञापन देने आ रहे अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पुलिस ने काली नदी पर रोका तो वह बरेली-इटावा हाईवे पर धरने पर बैठ गए। सड़क पर धरना शुरू होने से कुछ ही देर में हाईवे पर दोनों ओर लंबा जाम लग गया। सूचना पर सीओ मोहम्मदाबाद ने मौके पर जांच ब्राह्मण संगठन के नेता से बात कर ज्ञापन लिया। करीब दो घंटे बाद जाम खुलवाया जा सका। ब्राह्मण संगठनों के नेता वहीं से मैनपुरी की ओर लौट गए।
बसपा नेता डॉ. अनुपम दुबे और उनके परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप लगाकर अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने मंगलवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर डीएम मानवेंद्र सिंह को ज्ञापन देने का एलान किया था। इस पर पुलिस सुबह से ही सक्रिय हो गई।
राजेंद्र त्रिपाठी, प्रदेश प्रभारी किशन दुबे, परशुराम सेना के प्रदेेश अध्यक्ष पंडित विनय तिवारी, सर्वजन हित पाटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित श्याम नारायण चौबे की अगुवाई में बड़ी संख्या में मैनपुरी जिले के बेवर कस्बे में एकत्र हुए। एसडीएम स़ुधीर कुमार और भोगांव सीओ अजय नारायण राव ने भीड़ को बेवर में ही रोकने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली।
ब्राह्मण संगठनों के नेता करीब 40 कारों के काफिले के साथ फर्रुखाबाद की ओर आ रहे थे। काली नदी पुल के पास मोहम्मदाबाद कोतवाल दिलीप कुमार बिंद की अगुवाई में मौजूद पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस पर भीड़ ने डीएम-एसपी फर्रुखाबाद मुर्दाबाद के नारे लगाने लगी और राजेंद्र नाथ इटावा-बरेली हाईवे पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने बिना ज्ञापन दिए लौटने से इनकार कर दिया। सड़क पर धरना देने से हाईवे पर जाम लग गया। जाम में स्कूली बसें व महिलाएं भी फंस गईं।
सूचना पर सीओ मोहम्मदाबाद राजवीर सिंह गौर ने मौके पर जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष से बातचीत की।
राजेंद्र नाथ ने समर्थकों को बताया कि डॉ. अनुपम दुबे पर अब बिना जांच के कोई मुकदमा दर्ज नहीं होगा। अब तक दर्ज मुकदमों की समीक्षा का आश्वासन भी मिला है। इसके बाद सीओ मोहम्मदाबाद, एसडीएम को ज्ञापन देकर धरना समाप्त कर दिया। धरना प्रदर्शन के कारण करीब दो घंटे तक हाईवे पर वाहन फंसे रहे। राजेद्र नाथ के काफिले को बेवर की ओर से निकाला गया।
अनुपम फरार थे तो डीएम ने कैसे ली चेक
धरने के दौरान राजेंद्र नाथ ने कहा कि बसपा नेता अनुपम दुबे पर वर्ष 2010 के बाद से कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। तीन मुकदमों को छोड़कर अन्य मुकदमों में वह कोर्ट से दोषमुक्त हो चुके हैं। कोरोना के समय अनुपम ने डीएम मानवेंद्र सिंह को दो लाख रुपये की चेक दी थी। उस दौरान डीएम को नहीं पता था कि अनुपम फरार चल रहे हैं। यदि व फरार थे तो डीएम भी उतने की दोषी हैं। डीएम पर पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। राजेंद्र ने बताया कि ज्ञापन में अनुपम व उनके परिजनों पर दर्ज मुकदमों की जांच करवाकर समाप्त करने व उनके परिवार का उत्पीड़न बंद करने की मांग की गई है। मांगें पूरी न हुईं तो सात दिन में विधान सभा के बाहर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा।
अनुपम के समर्थकों को घर-घर जाकर धमका रही पुलिस
प्रदेश प्रभारी किशन दुबे ने कहा कि अनुपम के समर्थकों को घर-घर जाकर पुलिस धमका रही है। कन्नौज में फरवरी हुई घटना का झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। घटना के दिन मुकदमे का वादी जानलेवा हमले के मुकदमे में पकड़ा गया था और दूसरे दिन जेल गया था। एक दिन में दो अलग-अलग घटना कैसे हो सकती हैं।
पुलिस अभिरक्षा में अनुपम कैसे दे सकते हैं धमकी
श्याम नारायण चौबे ने कहा कि फर्रुखाबाद के एसपी अशोक कुमार मीणा ने मैनपुरी जेल से पुलिस अभिरक्षा में फतेहगढ़ जिला जज की कोर्ट में पहुंचे अनुपम के खिलाफ कोर्ट परिसर में धमकी देने का मुकदमा दर्ज करवा दिया। पेशी के दौरान मैनपुरी व फतेहगढ़ की पुलिस मौजूद थी। पुलिस की मौजूदगी में धमकी देने का सवाल ही नहीं उठता है। बिना जांच के मुकदमा दर्ज कर परेशान किया जा रहा है।