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एंबुलेंस में फर्जी मरीजों को ढोने की होगी जांच

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फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य महानिदेशक ने सरकारी एंबुलेंस से ढोए जा रहे मरीजों के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। इससे सेवा प्रदाता कंपनी के अफसरों में हड़कंप मचा है। महानिदेशक ने एंबुलेंस कंपनी से तीन महीने के प्राप्त आंकड़े तथा वास्तविक मरीजों की संख्या के पीसीआर में दर्ज आधार कार्ड और मोबाइल नंबर का मिलान कराने के आदेश दिए हैं।
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चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक वेदव्रत सिंह ने सीएमओ को पत्र भेजकर एंबुलेंस के मरीजों को सही सेवा उपलब्ध न होने पर नाराजगी व्यक्त की है। कहा कि एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी लक्ष्य तय करके प्रत्येक एंबुलेंस पर फर्जी केसों (फर्जी मरीजों को ढोने) की संख्या दिखा रही है।
यही नहीं काल्पनिक पीसीआर भरने की बात भी सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि फरवरी, मार्च और अप्रैल के आंकड़ों का सात दिन में मिलान कराया जाए। इसके लिए एक जांच टीम का गठन होगा। तीन माह में रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।
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जांच टीम में यह अधिकारी होंगे शामिल
मंडलीय अपर निदेशक के नेतृत्व में गठित जांच टीम में डिवीजनल प्रोग्राम मैनेजर, एनएचएम के नोडल अधिकारी, सीएमओ, एंबुलेंस से नोडल अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला प्रोग्राम मैनेजर शामिल रहेंगे।
ईएमटी की कॉल पर रिश्तेदार को कानपुर से लाया चालक
लोहिया अस्पताल में 102 एंबुलेंस पर तैनात एक इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) ने 27 जून 2021 को अपने सीयूजी नंबर से फोन किया। पीसीआर पर शाम तीन बजे ईएमटी को ही मरीज दिखाकर कानपुर ले जाना दर्शाया गया।
पीसीआर पर लोहिया अस्पताल का आईपीडी नंबर डाला गया। यह काम जहानगंज लोकेशन की एंबुलेंस ने किया। कागजों में हेराफेरी कर एक एंबुलेंस चालक कानपुर के निजी अस्पताल में भर्ती रिश्तेदार को लाया। एंबुलेंस के पीसीआर में ओपीडी नंबर 4032 दर्शाया गया, जबकि उस तारीख के ओपीडी नंबर में करीब डेढ़ हजार का अंतर है। इससे आशंका है कि जांच हो तो कई फर्जी केस निकलेंगे।
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