फर्रुखाबाद। भागीरथी के जल को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सरकार ने 252 करोड़ रुपये खर्च कर 47.7 एमएलडी के दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट करवाए हैं। इन्हें चालू करने में लेटलतीफी का ही नतीजा है कि अभी तक शहर के तीन नालों को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सका है। इसी के चलते नालों का 10 एमएलडी (10 लाख लीटर) से अधिक गंदा पानी गंगा में बह रहा है। लिहाजा जल आचमन के लायक नहीं है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की शनिवार को आई रिपोर्ट ने हर गंगा भक्त को सकते में लाकर खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रदेश के 247 नालों से होकर गंगा और सहायक नदियों में पानी जा रहा है। इससे गंगा का जल आचमन करने योग्य नहीं है। शहर के अमेठी जदीद में 30 और फतेहगढ़ में 17.7 एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनकर तैयार होने का दावा किया जा रहा है। इसका ट्रायल भी शुरू हो गया है, मगर अभी तक शहर का टोंका घाट नाले का पूरा और सलावत खां नाले का आधा पानी ही एसटीपी में भेजा जा रहा है।
इसके अलावा फतेहगढ़ में हाथी खाना नाला ही बंद किया गया। कैंट और बरगदिया घाट के नालों को बंद करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अभी तक तीन बड़े नालों का 10 एमएलडी से अधिक पानी गंगा को प्रदूषित कर रहा है।
बता दें कि माघ माह में पांचाल घाट पर एक महीना के लिए रामनगरिया मेला और प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक कुंभ लगने जा रहा है। ऐसे में साफ है कि गंगा भक्तों को प्रदूषित जल में स्नान कर आचमन भी करना मजबूरी होगा।
कांशीराम कालोनी का नाला भी टैप नहीं
पक्कापुल, गुदड़ी, नौलक्खा होकर कांशीराम कालोनी के बाद हैवतपुुर गढि़या के आगे वन विभाग की जमीन में जलभराव करने वाला नाला भी अभी तक टैप नहीं किया गया है। करीब 50 मीटर पाइपलाइन खेत से होकर जाएगी। विभागीय अधिकारी और किसान में सहमति नहीं बन पा रही है। इससे दिक्कत बनी हुआ है।
सभी नालों को जल्द बंद करने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारी को पत्र लिख दिया है। जल निगम के एई ने किसान से वार्ता भी की है। गंगा में नालों का सीधा पानी न जाए, इसके लिए वह हर रोज निगरानी कर रहे हैं। खुद मौके पर जाकर सच को देखेंगे।
- विनोद कुमार, ईओ, नगर पालिका परिषद