अयोध्या। महायज्ञ के समापन कार्यक्रम के अंत में सीएम योगी आदित्यनाथ का संतों के प्रति अनुराग भी छलका। सीएम योगी ने संतों के साथ भोजन किया तो उनके प्रति आत्मीयता व कृतज्ञता ज्ञापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
केले के पत्ते पर जब संतों की पंगत सजी तो पर्यावरण संरक्षण व संत परंपरा के अनुपालन का भी संदेश देने का काम हुआ। कार्यक्रम में संतों के साथ भोजन का कार्यक्रम पहले से ही सुनिश्चित था।
इसी के तहत यज्ञमंडप के पास ही एक पंडाल बनाया गया था, जहां सीएम योगी आदित्यनाथ ने जमीन पर बैठकर संतों के साथ शुद्ध-सात्विक, संत परंपरा के अनुकूल भोजन किया।
भोजन के लिए न सिर्फ मिट्टी के ही बर्तनों का प्रयोग किया गया बल्कि थाली के ऊपर केले के पत्ते सजे थे, जिस पर सीएम सहित संतों को भोजन परोसा गया।
पूड़ी, दाल, चावल, कढ़ी, पकौड़ी, मटर पनीर, खीर, गाजर का हलुआ, रबड़ी, राब सहित अन्य व्यंजनों का स्वाद योगी ने पंगत में चखा। करीब आधा घंटे तक सीएम ने संतों के साथ पंगत करते बिताया, इस दौरान वे संतों से तमाम तरह की चर्चा भी करते रहे।
संतों ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनके नेतृत्व में अयोध्या अपनी पुरातन पंपराओं को सहेजते हुए नित नये आयाम स्थापित कर रही है। ज.गु. रामदिनेशाचार्य ने कहा कि राजसत्ता का भार संभालते हुए भी सीएम योगी संत परंपरा का पूरी प्रतिबद्धता से पालन करते हैं।
निश्चित रूप से ही वे योगी तो हैं ही, कर्मयोगी भी हैं। अयोध्या का उत्कर्ष देखकर यह अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। इस दौरान मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, महंत वैदेही वल्लभ शरण, महंत मैथिलीरमण शरण, महंत रामशरण दास, महंत डॉ. भरत दास, महंत सुरेश दास, अधिकारी राजकुमार दास, महंत रामदास नाका हनुमानगढ़ी, निर्वाणी अनी के महंत धर्मदास, महंत विवेक आचारी, महंत रामकुमार दास, महंत रामभूषण दास कृपालु, महंत शशिकांत दास, मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गुरुजीत सिंह, महंत आशुतोष दास, पुजारी रमेश दास, राजूदास सहित अन्य संत-धर्माचार्य सीएम की आत्मीयता से अभिभूत दिखे।