अयोध्या। राममंदिर निर्माण का काम जहां एक तरफ तेजी से चल रहा है वहीं ट्रस्ट रामजन्मभूमि में भक्तों के लिए सुविधाएं विकसित करने पर भी मंथन करने में जुटा हुआ है।
ट्रस्ट का फोकस रामलला के भक्तों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है। ट्रस्ट ने एक टीम बनाई है जो तिरुपति, जगन्नाथपुरी, स्वर्णमंदिर, वैष्णोदेवी सहित दक्षिण के बड़े मंदिरों का सर्वे कर उनकी व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रही है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल ने बताया कि राममंदिर निर्माण शुरू होने के साथ ही रामलला के दर्शनार्थियों की संख्या कई गुना बढ़ गई है।
ट्रस्ट का मानना है जब राममंदिर बन जाएगा तब हर रोज करीब एक लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन को आएंगे। पर्व व त्योहारों पर यह संख्या पांच गुना तक बढ़ जाएगी।
ऐसे में रामजन्मभूमि परिसर में भक्तों को न सिर्फ रामलला के सर्वसुलभ दर्शन प्राप्त हो बल्कि अन्य यात्री सुविधाएं भी उन्हें प्राप्त हो सके। इसी के लिए ट्रस्ट पहले चरण में 25 हजार यात्रियों के लिए परिसर में यात्री सुविधा केंद्र बनाने की तैयारी में है।
इसका नक्शा पास कराने के लिए ट्रस्ट ने विकास प्राधिकरण में आवेदन भी कर दिया गया है। लाखों की संख्या में जब भक्त आएंगे तो मंदिर में उनके रुकने की व्यवस्था कहां होगी। जूता-चप्पल, सामान आदि रखने के इंतजाम सहित अन्य व्यवस्थाओं का खाका तैयार किया जा रहा है।
इसके लिए ट्रस्ट ने एक टीम बनाई जो देश के बड़े मंदिरों की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रही है। दर्शन आदि की क्या सुविधा व व्यवस्था है। इसका अध्ययन कर यह टीम एक रिपोर्ट तैयार कर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
जैसे जगन्नाथ पुरी मंदिर में दर्शन के लिए टिकट की व्यवस्था लागू है। स्वर्ण मंदिर में ऑटोमैटिक मशीन लगी हुई है। भक्त अपने जूते-चप्पल जिस बॉक्स में भक्त उतारते हैं। निकास मार्ग पर उन्हें उसी बॉक्स में मशीन के जरिए प्राप्त होता है।
तिरुपति मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में दर्शनार्थी आते हैं। ऐसे में राममंदिर में दर्शन की व्यवस्था तिरुपति की तर्ज पर हो।
इसको लेकर ट्रस्ट की एक टीम सर्वे के लिए तिरुपति गई भी है। इसी तरह देश के अन्य प्रमुख मंदिरों की व्यवस्था का ट्रस्ट अध्ययन करा रहा है।
इन बिंदुओं पर हो रहा अध्ययन
- दर्शनार्थियों की व्यवस्था
- वीईपी दर्शन की व्यवस्था
- प्रसाद वितरण की व्यवस्था
- आरती में भक्तों की मौजूदगी
- भगवान के राग-भोग की व्यवस्था
- भक्तों की संख्या का हो रिकॉर्ड
- ठहरने की व्यवस्था
- अमानती घर का संचालन
- पेयजल व प्रसाधन की व्यवस्था
- भीड़ नियंत्रण का प्रबंधन
- दर्शन मार्ग की सुविधाएं