सोमनाथ मंदिर जैसा संघर्षपूर्ण व दिलचस्प इतिहास राम जन्मभूमि का भी है। सोमनाथ के संघर्ष में जहां कई पड़ाव आए, वहीं राम जन्मभूमि आंदोलन से खूनी संघर्ष से लेकर न्यायालय की लंबी लड़ाई तक कई अध्याय जुड़े। केंद्र व प्रदेश की कई सरकारों को बनाने व बिगाड़ने में भी अयोध्या ने बड़ी भूमिका निभाई। मार्च 1885 में फैजाबाद के तत्कालीन जिला न्यायाधीश सीएम चैंबियर के रामजन्म स्थान पर पूजा अर्चना और मूर्तियों को यथावत रखने के निर्णय से लेकर उच्चतम न्यायालय के 9 नवंबर, 2019 के अंतिम फैसले द्वारा 2.77 एकड़ भूमि का विवाद और रामलला विराजमान का भूमि पर मालिकाना हक के निर्णय से सारे विवादों का पटाक्षेप होने तक लंबा व रोचक इतिहास है।
शिल्पकार गुजरात का एक ही परिवार
मंदिर का डिजाइन गुजरात के चंद्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया है। चंद्रकांत उन प्रभाशंकर सोमपुरा के पुत्र हैं जिन्होंने सोमनाथ मंदिर का डिजाइन बनाया था। राजनीति शास्त्री प्रो. एसके द्विवेदी पीएम नरेंद्र मोदी के राम मंदिर के भूमि पूजन में शामिल होने का विरोध करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए कहते हैं कि तथ्यों को न समझने वाले नेहरू को महान बताते हुए मोदी की अयोध्या यात्रा का विरोध कर रहे हैं। ये मानसिकता वह है जिसने पंथनिरपेक्षता को धर्मनिरपेक्षता का स्वरूप दे दिया और इसकी आड़ में तुष्टीकरण को बढ़ावा दिया। नेहरू को सोमनाथ मंदिर के लिए सरकार के कोष से धन देने पर आपत्ति थी लेकिन मस्जिदों की मरम्मत के लिए धन देने में कोई दिक्कत नहीं थी।
शिलान्यास का भी संयोग
श्रीराम जन्मभूमि पर शिलान्यास भी दो प्रधानमंत्रियों की भूमिका के संयोग को जोड़ रहा है। एक राजीव गांधी और दूसरे नरेंद्र मोदी। राजीव शिलान्यास में आए तो नहीं थे लेकिन 9 नवंबर, 1989 को यहां शिलान्यास की अनुमति दी थी। 9 नवंबर, 1989 को जहां शिलान्यास हुआ था वह स्थल उस समय की विवादित 2.77 एकड़ भूमि के बाहर एवं मौजूदा मंदिर के प्रारूप के सिंहद्वार पर था। यह अलग बात है कि राजीव सरकार शिलान्यास की घोषणा के साथ-साथ ही मस्जिद समर्थकों और कथित धर्मनिरपेक्ष लोगों के निशाने पर आ गई। सरकार 24 घंटे के भीतर ही इतने दबाव में आ गई कि शिलान्यास स्थल को विवादित बताते हुए काम रुकवा दिया।
यूपी और गुजरात का संयोग
मोदी का राम जन्मभूमि स्थल पर आना भावी पीढ़ी को बताएगा कि नेहरू के रूप में उत्तर प्रदेश से सांसद चुने गए एक प्रधानमंत्री ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर में शिवलिंग की पुनर्प्रतिष्ठा में शामिल होने से इन्कार कर दिया था। जबकि सोमनाथ की धरती पर जन्म लेने वाले व उत्तर प्रदेश से सांसद नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के भूमि पूजन में हिस्सा लेने में संकोच नहीं किया।